फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये कैसी सुरक्षा, मजाक बनी पुलिस की गश्त

विज्ञापन
विज्ञापन
हरिद्वार।
विज्ञापन

एप्पल स्टोर से 70 लाख की चोरी की वारदात को अंजाम देने वाले चोरों ने हरिद्वार पुलिस के दावों की पोल खोल कर रख दी। इस चोरी के बाद यह सवाल उठने लगा है कि पॉश एरिया की सुरक्षा व्यवस्था का यह आलम है तो फिर शहर के बाहरी इलाकों और गांवों का क्या होगा।
स्टोर के शटर काटने से लेकर इतने मोबाइल और अन्य कीमती सामान समेटने में चोरों को काफी वक्त लगा होगा। तो क्या इतनी देर तक पुलिस इस इलाके में थी ही नहीं। रात के समय चोर सामान समेटकर शहर से निकल भी गए और कहीं जांच नहीं हुई। ये घटना बेहद ही दुस्साहसिक है। जहां चोरी हुई वह शहर का सबसे पॉश एरिया है। यह सड़क रात भर चलती है। चोरी की इस घटना में एक या दो नहीं कई लोग शामिल रहे होंगे। बड़ा सवाल ये है कि हरिद्वार पुलिस आखिर कहां थी। सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे और दम भरने वाले अफसर अब सब के सब खामोशी की चादर ओढ़े बैठे हैं। इस वारदात से हरिद्वार के कारोबारी वर्ग में असुरक्षा की भावना का घर करना लाजिमी है।
विज्ञापन

------------------
अलार्म सिस्टम में लगे मोबाइल नहीं छेड़े
चोर बेहद ही शातिर थे। शोरूम का शटर काटने से लेकर कौन कौन से मोबाइल पर हाथ साफ करना है ये वे जानते थे। पुलिस भी चोरों के स्टाइल से सन्न है। दरअसल, शटर काटने में भी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। अंदर भी चोरों ने बड़ी ही समझदारी से कार्य किया। उन्होंने उन 11 मोबाइल फोन को हाथ तक नहीं लगाया, जो अलार्म सिस्टम पर थे। अलार्म बजते ही घटना का पता चल जाना था। एक मोबाइल फोन का अलार्म सिस्टम पंद्रह मिनट तक एक्टिव होता है। इसलिए उन्होंने उन फोन को छुआ तक नहीं। दूसरी बात डमी मोबाइल फोन भी ज्यों के त्यों है। उनका डीवीआर को भी ले जाना बताता है कि वह एक्सपर्ट थे।
एक बात हैरान करने वाली है कि गल्ले की चाभी के बारे में भला कैसे जानकारी हुई, क्या चोरों की किस्मत ने साथ दिया या फिर कुछ ओर बात है। दूसरी बात ये है कि मोबाइल फोन जिन जिन अलमिलरा में रखे थे, उनकी चाभी भी गल्ले के नीचे ही थी, ये कैसे पता चला। ये सवाल पुलिस को परेशान किए हुए है। एक गौर करने वाली बात ये भी है कि पड़ोस में लगे सीसीटीवी कैमरे में चोर कैद नहीं हुए है।
---------------------
सीसीटीवी कैमरे खंगाले जा रहे
हरिद्वार। चोरी की इस बड़ी वारदात की गुत्थी सुलझाने के लिए हरिद्वार पुलिस ने ताकत झोंक दी है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगालने में एक टीम जुट गई है। दूसरा घटनास्थल से सेल डॉटा भी उठाया गया है ताकि ये पता चल सकें कि उस मोबाइल टॉवर पर कौन कौन से मोबाइल फोन रन कर रहे थे। उनकी मूवमेंट कहां कहां रही, ये सब भी पता चल सकेगा। सीआईयू इस कार्य में ही लगी हैं।
---------------------
मोबाइल फोन का इस्तेमाल होने पर बेनकाब होंगे चोर
- एप्पल कंपनी की तकनीक बन सकती है मददगार, पार्टस ही बेचकर बच सकते है चोर
कुणाल दरगन
हरिद्वार।
एप्पल कंपनी का एक भी मोबाइल फोन एक्टिव होगा तो पुलिस के हाथ सीधे चोरों के गिरेबां तक पहुंच सकते है। एप्पल कंपनी की तकनीक ही कुछ ऐसी है, पुलिस को केवल चोरों को धर दबोचने की ही जोर आजमाइश करनी होगी। सीआईयू का फोकस इसी पर है।
एप्पल का मोबाइल फोन सिम कार्ड का इस्तेमाल करने पर ही एक्टिव होता है। दूसरे एंड्रायड मोबाइल फोन वाईफाई से कनेक्ट कर रन किए जा सकते है, पर एप्पल में ऐसा सिस्टम नहीं है। एप्पल कंपनी का अपना एक पेनवर्ड सरवर है। ये एप्पल मोबाइल फोन का ही डाटा सेव करता है, जैसे ही कही भी विश्वभर में एप्पल का मोबाइल फोन एक्टिव होता है, उसकी जानकारी आटोमैटिक इस सरवर में आ जाती है
यही नहीं एक तरह से आईएमईएमआई ही फोन की एक्टीवेशन आईडी है, यानि कि अगर पूरे विश्व में भी कही भी चोरी हुए इन फोन में सिम कार्ड डाला जाता है तो उसकी खबर लग जाएगी। किसी भी दूसरी तकनीक से इन मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। हां, केवल मोबाइल फोन के पार्ट निकालकर बेचे जा सकते है। एप्पल स्टोर से चोरी हुए मोबाइल फोन की सभी जरूरी जानकारी कंपनी को उपलब्ध करा दी जाएगी, ताकि उन पर पैनी निगाह रखी जा सके।
विज्ञापन

----------
स्टोर का है बीमा
हरिद्वार। एप्पल के स्टोर का बीमा किया हुआ है। ये बात पुलिस की पड़ताल में सामने आई है। इसलिए, स्टोर मालिक को ज्यादा नुकसान नहीं होने वाला, लेकिन एसेसीरीज का बीमा नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें