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I- अमर उजाला की ओर से आयोजित शिविर में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
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I- किसी का 51 तो कई का 400 पर मिला शुगर लेवल, तत्काल इलाज की दी गई सलाहI
40 में से 37 डायबिटीज मरीजों को पता ही नहीं कि उन्हें चक्कर क्यों आ रहे हैं। न तो उन्हें बीमारी का पता है और न ही लक्षण और इसके खतरों की कोई जानकारी है। यह चौंकाने वाले तथ्य पिछले दिनों अमर उजाला की ओर से आयोजित स्वास्थ्य शिविर में सामने आए।
दरअसल, 30 जनवरी को अमर उजाला ने मैक्स अस्पताल के सहयोग से विकास कॉलोनी में स्वास्थ्य शिविर लगाया था। इसमें कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। कुछ मरीजों की हालत तो इस कदर बिगड़ी मिली कि वह शुगर के मरीज तो हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि वह किस कारण से परेशान हैं। शिविर में जांच कराने आईं कई महिलाओं ने चिकित्सकों को बताया कि उन्हें अक्सर चक्कर आते हैं। घरवालों को भी बताया तो कमजोरी समझकर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। कई तो डॉक्टर की दी हुई गोलियां भी खा रही हैं, लेकिन उन्हें इसका वास्तविक कारण पता नहीं है।
यही नहीं कई वृद्ध महिलाएं जो 60 से 65 वर्ष के बीच में हैं, उन्हें भी इसी तरह की दिक्कत थी, लेकिन उन्होंने कभी परिजनों से भी इसका जिक्र नहीं किया। शिविर में एक मरीज की हालत तो यह थी कि शुगर लेवल 51 तक आ गया था। इस पर मैक्स की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आनंदिता ने कहा कि इन्हें तत्काल मीठा खिलाओ। करीब आधे घंटे की काउंसलिंग के बाद फिर से जांच कराई गई तो शुगर लेवल 112 पर आया। इसी तरह एक महिला का शुगर लेवल 400 से ऊपर देखकर चिकित्सक ने तत्काल इलाज का सुझाव दिया।
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Iइलाज के लिए ज्यादातर हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीज आ रहे हैं। अधिक तनाव, खानपान में असंतुलन इसका प्रमुख कारण है। इससे बचाव के लिए खानपान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना होगा। ज्यादा पेशाब आना, चक्कर आना, कुछ दूर चलने पर थकान या घबराहट होने होने पर तत्काल परीक्षण कराना चाहिए। नियमित व्यायाम भी फायदेमंद हो सकता है।
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I- डॉ. स्वाति, फिजीशियन, जिला चिकित्सालय, हरिद्वारI
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Iऐसे आहार, जिनसे शुगर अधिक प्रवाहित होती है, उन्हें त्यागना होगा। गेहूं के उत्पाद की अपेक्षा मोटे अनाज जौ, बाजरा, मक्का, मंडुआ चना आदि का प्रयोग करना होगा। यदि बैठकर ज्यादा काम करते हैं तो यह घातक है। ऐसे में योग, आहार और विहार पर ध्यान देना होगा। तनाव नहीं लेना है। योग और ध्यान अपनाना होगा। गंभीर स्थित में चिकित्सक की सलाह अनिवार्य है।
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I- डॉ. रमेश चंद्र तिवारी, आयुर्वेदाचार्य, उत्तराखंड आयुर्वेदिक विवि परिसर ऋषिकुल, हरिद्वारI