ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
होली के त्यौहार में अब केवल आठ दिन शेष रहे गए हैं। गुरुवार से आठ दिनों के होलाष्टक लग जाएंगे। ऐसा होते ही सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।
होलाष्टकों में कोई भी धार्मिक कार्य संपन्न नहीं कराया जाता। विवाह, यज्ञोपवीत, कर्ण छेदन, मुंडन आदि कोई भी संस्कार नहीं हो सकता। इन दिनों को तंत्र शक्तियों के दिन माना जाता है। होलाष्टकों का समापन 21 मार्च फाग के दिन होगा। होलाष्टकों में घरों और दुकानों के मुहूर्त आदि करना भी शास्त्रों की दृष्टि से वर्जित है। होलाष्टकों का प्रभाव अनेक आकाशीय शक्तियों के कारण धरती पर पड़ता है। ये दिन क्लिष्ट दिन माने गए हैं। होलाष्टकों के दौरान एक जमाने में छोटे बच्चे और महिलाएं घरों से बाहर नहीं निकला करते थे। ज्योतिष के अनुसार होलाष्टकों का आंशिक प्रभाव होली बीत जाने के आठ दिन बाद भी रहता है। परिणाम स्वरूप उन आठ दिनों में भी मुहूर्त नहीं निकाले जाते।