फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने सार्की टोला लोहाघाट के अजय गोर्खा को छह साल कैद और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अजय गोर्खा ने 24 अगस्त 2014 को अपने भाई शक्ति गोर्खा का पिछड़ी जाति गोर्खा समुदाय का प्रमाणपत्र बनवाया गया, जिसमें तहसीलदार की मुहर और हस्ताक्षर फर्जी थे।
फर्जी प्रमाणपत्र तब पकड़ में आया जब 31 मार्च 2015 को प्रेम गोर्खा अपना पिछड़ी जाति का प्रमाणपत्र बनवाने आया और भाई के प्रमाणपत्र को साक्ष्य के तौर पर पेश किया।
तहसीलदार हर सिंह रजवाड़ ने फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने के आरोप में अजय गोर्खा के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत मुकदमा दर्ज करवाया।
जुर्माना न देने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास
सीजेएम मनमोहन सिंह ने मामले की सुनवाई के बाद अजय गोर्खा पर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने के आरोप सही पाए। आईपीसी की धारा 420 के अंतर्गत उसे 3 साल कठोर कारावास एवं पांच हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न देने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास, धारा 467 के अंतर्गत 6 साल कठोर कारावास एवं पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
जुर्माना न देने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। आईपीसी की धारा 471 के अंतर्गत 3 साल का कठोर
कारावास एवं पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
जुर्माना न देने पर तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा जेल में बिताई गई अवधि मूल दंडादेश में समायोजित होगी। अभियोजन पक्ष की ओर से नामिक अधिवक्ता आलोक पांडेय ने पक्ष रखा।