चंपावत। चंपावत जिले की वन पंचायतें जंगल की आग बुझाने में हाथ बटाएंगी। इस काम में वन पंचायत को रॉयल्टी से मिलने वाली राशि के एक हिस्से का उपयोग करना होगा। वन विभाग ने जिले की 568 में से 176 वन पंचायतों को 1.53 करोड़ रुपये दिए हैं। वन पंचायतें इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से वनों को आग से बचाव, जल संवर्द्धन और पौधरोपण के लिए करेंगी।
पहले चरण में प्रमुख रूप से आग के मद्देनजर संवेदनशील क्षेत्र की वन पंचायतों को यह राशि दी गई है। शेष 392 वन पंचायतों को जल्द राशि दी जाएगी। लीसा विदोहन, सूखे पेड़ के निस्तारण से मिलने वाली रॉयल्टी की राशि वन पंचायतों को दी जाती है।
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चंपावत वन प्रभाग की 176 वन पंचायतों को 1.53 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वन पंचायतों से इस राशि से पंचायती जंगलों को दावाग्रि से बचाव के लिए फायर वॉचर रखने सहित एहतियाती उपाय करने के लिए कहा गया है। - आरसी कांडपाल, डीएफओ, चंपावत।
कठपुतली के माध्यम से बता रहे वनों की आग के नुकसान
चंपावत। दावाग्रि से निपटने के लिए वन विभाग पहली बार जागरूकता बढ़ाने के लिए कठपुतली नृत्य का सहारा ले रहा है। चंपावत के आसपास बगेड़ी, बस्टिया मझेड़ा, धौन, नायल, बड़ोली गांव में कठपुली कार्यक्रम शुक्रवार से शुरू हुए। रेंजर बीएम टम्टा ने बताया कि कठपुतली नृत्य के जरिए लोगों को जंगल से होने वाले लाभ, आग लगने से गांव, उनके आसपास के जंगल, पानी, हवा और उनकी आजीविका पर पड़ने वाले असर की रोचक अंदाज में जानकारी दी गई। डीएफओ कांडपाल ने बताया कि जिले के 200 संवेदनशील गांवों में कठपुतली के माध्यम से लोगों को वनों के प्रति संवेदनशील बनाया जाएगा। जिले में 2022 में आग लगने की 80 घटनाएं हुई थी जो पिछले कई सालों में सर्वाधिक है। इसमें 52.25 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुए है।