चंपावत। जोशीमठ के भू-धंसाव की खबरों से सुदूर सीमांत पंचेश्वर के लोगों में भी बेचैनी है। उनकी चिंता भारत-नेपाल सीमा पर प्रस्तावित पंचेश्वर बांध की सुरक्षा को लेकर है। बांध के भूगर्भीय सर्वेक्षण के लिए केंद्रीय जल आयोग की वैप्कास कंपनी 625 मीटर लंबी भूमिगत सुरंग बनाने का काम चार साल पहले ही पूरा हो चुका है। हालांकि 2020 से बांध क्षेत्र में न कोई काम हो रहा है और न कोई हलचल ही है लेकिन भविष्य में इसके बनने की संभावना से लोग चिंतित हैं।
60 हजार करोड़ रुपये की 5040 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता वाली 315 मीटर ऊंचाई की प्रस्तावित बांध परियोजना में तीन साल से ठहराव की स्थिति है लेकिन इसके बनने से चंपावत, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिले का 76 वर्ग किमी हिस्सा डूब क्षेत्र में समा जाएगा। बांध निर्माण की डीपीआर तैयार करने वाली वाप्कोस कंपनी के मुताबिक भारत का 76 वर्ग किमी और नेपाल का 40 वर्ग किमी भूभाग प्रभावित क्षेत्र में होगा।
चंपावत जिले के डूब क्षेत्र में 19 विभागों की करीब 1.60 अरब रुपये की परिसंपत्तियां प्रभावित होंगी। प्रस्तावित बांध क्षेत्र भूगर्भीय हलचलों की दृष्टि से जोन चार में शामिल बताया गया है। बांध का विरोध करने वाले पर्यावरणविद मोहन भाई और ओंकार सिंह धोनी का कहना है कि पंचेश्वर बांध में जल को रोकने से यहां 80 करोड़ घन लीटर पानी का अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। इस कारण इस संवेदनशील क्षेत्र की चट्टानों के खिसकने और धंसने का खतरा बढ़ेगा। संवाद
बांध निर्माण से विस्थापित होंगे तीन जिलों के 134 गांव
चंपावत। प्रस्तावित बांध परियोजना तीन जिलों के 134 गांवों के डूब क्षेत्र में आने से 31 हजार से अधिक लोग विस्थापित होंगे। इसमें चंपावत के 26, पिथौरागढ़ के 87 और अल्मोड़ा जिले के 21 गांव शामिल हैं। संवाद
बांध बनने पर डूबेगा शिव मंदिर
चंपावत। पंचेश्वर बांध के बनने की दशा में पंचेश्वर का शिव मंदिर भी डूब जाएगा। इस मंदिर में सालभर श्रद्धालु आते हैं लेकिन मकर संक्रांति के दिन यहां बड़ा मेला लगता है जिसमें दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग हिस्सा लेते हैं। यहां शिव की मूर्ति और शिवलिंग नाग देवता के साथ स्थापित हैं। संवाद
शिव के पवित्र पंचेश्वर महादेव मंदिर के प्रति भारत और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों में अगाध आस्था है। बांध बनने से यह आस्था भी डूब जाएगी। -खीमानंद सुतेड़ी, पुजारी, शिव मंदिर, पंचेश्वर।
पंचेश्वर सहित समूचे पहाड़ के लोगों ने यहां बांध की कभी भी मांग नहीं की। बांध बनने से सीमांत की इस खूबसूरत घाटी ही समाप्त नहीं होगी, विस्थापन और पर्यावरण का संकट भी गहराएगा। -गणेश सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता, पंचेश्वर।
प्रशासन का पक्ष
पंचेश्वर बांध भारत और नेपाल की संयुक्त परियोजना है। डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की वन विभाग चार साल पहले गिनती कर चुका है। फिलहाल परियोजना में कोई काम नहीं हो रहा है। भारत सरकार की ओर से बांध परियोजना को लेकर जैसे भी निर्देश होंगे उसके अनुरूप कदम उठाए जाएंगे। -नरेंद्र सिंह भंडारी, डीएम, चंपावत।
प्रस्तावित पंचेश्वर बांध स्थल में बनी सुरंग का शुरुआती हिस्सा। संवाद- फोटो : CHAMPAWAT