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समय पर मिली सूचना ने बचाई दो बच्चों की जान

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चंपावत जिला अस्पताल में भर्ती बच्चे। संवाद - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। मौनकांडा के राजकीय प्राथमिक स्कूल में बुधवार को हुए हादसे की जानकारी समय रहते मिलने से दो बच्चों रिंकू और शगुन की जान बच गई। आसपास के ग्रामीण जब मौके पर पहुंचे तो ये दोनों भी छत के नीचे दबे थे। उन्होंने सब्बल से टूटी छत के मलबे को हटाया और रिंकू, शगुन को बाहर निकाला। उस समय यह दोनों बेहोश थे। शिक्षक देवराम ने 108 एंबुलेंस और थाने में सूचना दी। पाटी से चिकित्सा टीम के पहुंचने के बाद इलाज शुरू हुआ।
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मौनकांडा में घायल चार बच्चों में से दो का अभी चंपावत जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। अलबत्ता बृहस्पतिवार को अस्पताल में चारों बच्चे थे। उनके साथ मौजूद अभिभावक श्याम सिंह और कैलाश सिंह ने बताया कि उनका घर स्कूल के पास (महज 25 मीटर दूर) है। बुधवार को 10:40 बजे स्कूल के निष्प्रयोज्य शौचालय की छत के गिरने और उसमें बच्चों के दबे होने की जानकारी एक मिनट से भी कम समय में मिली।
रोते-रोते पहुंचे एक बच्चे ने जैसे ही दुर्घटना की जानकारी दी तो वह दोनों सब्बल, फावड़े लेकर दौड़ कर शौचालय तक पहुंचे। उस वक्त चंदन, रिंकू और शगुन छत के नीचे दबे थे। उन्होंने सब्बल से टूटी छत के मलबे को हटाया। चंदन तो दम तोड़ चुका था जबकि रिंकू और शगुन बेहोश थे। दोनों अभिभावकों ने हादसे के लिए स्कूल की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।
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घायल रिंकू को नहीं पता कि उसका भाई अब इस दुनिया में नहीं
चंपावत। मौनकांडा प्राइमरी स्कूल में पांचवीं कक्षा का छात्र रिंकू जिला अस्पताल में भर्ती है। उसे नहीं पता कि उसका छोटा भाई चंदन अब इस दुनिया में नहीं है। चंदन के बड़े भाई रिंकू के अलावा शगुन, सोनी और हसीना को इलाज के लिए पहले लोहाघाट और फिर चंपावत लाया गया जबकि हिमांशु को मौनकांडा से घर भेज दिया गया।
रिंकू के सिर पर चोट है। उसे हल्का दर्द है। नन्हीं बच्ची सोनी का भी इलाज चल रहा है जबकि शगुन और हसीना अस्पताल में हैं। अभिभावक कैलाश सिंह और श्याम सिंह ने बताया कि बच्चे इंजेक्शन लगाने से खौफजदा हैं। रात में पहले तो सो गए लेकिन दर्द और डर की वजह से जागने के बाद रात को कुछ देर रोते रहे। पहली बार घर से दूर और वह भी अस्पताल में होने से ये बच्चे असहज महसूस कर रहे हैं। अभिभावक अस्पताल की व्यवस्था से संतुष्ट हैं।
डॉ. बैंकटेश द्विवेदी बताते हैं कि बच्चों की सेहत ठीक है। बच्चों ने बताया कि बुधवार को वह पहली बार खेलते-खेलते निष्प्रयोज्य शौचालय वाली जगह पहुंचे थे। इसी दौरान पांच बच्चे छत पर चढ़े थे और छत गिर गई।
चंदन का अंतिम संस्कार हुआ
पाटी (चंपावत)। शौचालय की छत के नीचे दबने से जान गंवाने वाले चंदन के शव का पोस्टमार्टम के बाद गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। एक बेकरी में काम करने वाले पिता गोधन सिंह देर शाम हिमाचल से यहां पहुंचे। अंतिम संस्कार के दौरान गांव के लोगों की आंखें नम थीं। परिजन इस घटना से सदमे में हैं।
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