देवीधुरा में एक साथ बगवाल खेलने वाली चम्याल खाम के धन सिंह सिंघवाल के परिवार की तीन पीढ़ी। संवा
पाटी/देवीधुरा (चंपावत)। मां बाराही धाम में होने वाली बगवाल आस्था का उत्कृष्ट नायाब नमूना पेश करती है। साथ ही बगवाल में हिस्सा लेने वालों के बीच उम्र का अंतर भी कोई मायने नहीं रखती। बृहस्पतिवार को खोलीखांड दुबचौड़ा मैदान में हुई बगवाल में भी ऐसा ही दिलकश नजारा था। एक साथ तीन पीढ़ी पूरे जोशी-ओ-खरोस के साथ बगवाल खेलती नजर आई। 75 साल के बुजुर्ग से लेकर 20 साल के युवा में एक जैसा उत्साह और उमंग रहा। चम्याल खाम के एक ही परिवार के चार लोगों ने बगवाल में जमकर फल फूल बरसाए। 75 वर्षीय धन सिंह सिंघवाल ने बृहस्पतिवार को अपने तीन बेटों लक्ष्मण (48) गिरीश (42) और गौरव (38) के अलावा पौत्र करन (20) के साथ बगवाल खेली। युवा करन को बगवाल के इतिहास, परंपरा और संस्कृति की भी जानकारी दी।
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आस्था: कंधे में फर्रा रखा मैदान पहुंचे बुजुर्ग पान सिंह
पाटी/देवीधुरा (चंपावत)। बगवाल मेले में आस्था के कई रंग नजर आए। बुजुर्ग श्रद्धालु भी युवाओं से कहीं पीछे नहीं थे। गहड़वाल खाम के पान सिंह अपने गांव भैसर्ख से भारीभरकम फर्रे को लेकर खोलीखांड दुबचौड़ा मैदान और फिर वापस ढाई किमी गांव पहुंचे। कहते हैं कि बगवाल आस्था के साथ उमंग और उन्नति की राह भी दिखाती है। इसके चलते वर्ष 2000 से वे लगातार बगवाल में हिस्सा लेते रहे। संवाद