पूर्णागिरि धाम (चंपावत)। पूर्णागिरि धाम में बीएसएनएल (भारत संचार निगम लिमिटेड) के मोबाइल नेटवर्क लगाने की अड़चन दूर हो गई है। दोनों मोबाइल टावर लगाने के लिए आरक्षित वन क्षेत्र में वन अनापत्ति मिल गई है। भारत सरकार ने आरक्षित वन क्षेत्र में टावर लगाने की सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। इससे अगले एक साल में क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। कनेक्टिविटी की समस्या दूर हुई तो मां पूर्णागिरि के ऑनलाइन दर्शन भी हो सकेंगे।
जिले को आध्यात्मिक पहचान देने वाले पूर्णागिरि धाम में हर साल 50 लाख से अधिक श्रद्धालु देवी दर्शन के लिए आते हैं लेकिन उन्हें लचर मोबाइल सेवा की वजह से परेशानी होती है। इस वजह से पूर्णागिरि क्षेत्र में मोबाइल फोन से संपर्क करना मुश्किल होता है। लचर नेटवर्क से ऑनलाइन देवी दर्शन का विकल्प भी लटका हुआ है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के एलान के बाद बीएसएनएल ने कुछ समय पहले पूर्णागिरि धाम में दो मोबाइल टावर का प्रस्ताव भेजा था। अब भारत सरकार ने बीएसएनएल के दो (पूर्णागिरि कक्ष संख्या दो और उपराकोट कक्ष संख्या दो) मोबाइल टावर लगाने के लिए वन अनापत्ति के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।
प्रभागीय वनाधिकारी आरसी कांडपाल ने बताया कि भारत सरकार ने मोबाइल टावर लगाने के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। इस अड़चन के दूर होने के बाद अब बीएसएनएल आगे की कार्रवाई करेगा।
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22 मोबाइल टावर लगे तो संपूर्ण संचार सेवा से जुड़ जाएगा चंपावत
चंपावत। पूर्णागिरि धाम के अलावा चंपावत जिले में 22 अन्य स्थानों पर मोबाइल सुविधा के लिए टावर लगाए जाने का प्रस्ताव है। बीएसएनएल के इन सभी टावर के लगने से चंपावत जिला संपूर्ण रूप से संचार सुविधा से जुड़ जाएगा।
जिले के इन 22 स्थानों पर प्रस्तावित हैं मोबाइल टावर:
बुड़म, ककनई, मथियाबांज, खटोली तल्ली, चांडड़ी, पिल्खीचमार, बगौटी, गोलडांडा, साल, पिनाना, बरकुम, गुरखोली, हरम, बड़ोली, सल्ली, नदेड़ा, लड़ाबोरा, करौली, उदाली, डनगांव, लफड़ा और तल्ला कफल्टा।