गर्भवती महिला को डोली से सड़क तक लाते बरमसकार गांव के लोग। पुरानी फोटो
चंपावत। ढाई माह भी नहीं बीता, जब झालाकुड़ी ग्राम पंचायत के सड़क विहीन बरमसकार तोक की एक गर्भवती पूजा देवी को 20 जून को अस्पताल पहुंचाने के लिए पांच किलोमीटर तक डोली से सड़क तक पहुंचाया गया। फिर 51 किमी दूर टनकपुर अस्पताल ले जाया गया। 108 सेवा की एंबुलेंस में प्रसव होना तो आम है। यह तस्वीर जिले में गर्भवतियों के इलाज की हालत की बानगी भर है। चंपावत जिले में जिला अस्पताल सहित चार अस्पतालों को छोड़ कहीं भी गर्भवतियों के इलाज की व्यवस्था नहीं है। यहां तक कि गायनाकोलॉजिस्ट भी सिर्फ जिला अस्पताल में है।
इस साल अप्रैल से जुलाई तक चार महीने में चंपावत जिले में कुल 628 प्रसव हुए हैं। जटिल प्रसव के लिए गर्भवती को अक्सर दूसरे शहरों में ले जाना पड़ता है। नेपाल सीमा से लगे इस जिले में एकमात्र स्त्री रोग विशेषज्ञ चंपावत जिला अस्पताल में है। लोहाघाट और टनकपुर उप जिला अस्पताल में भी जटिल प्रसव के लिए गर्भवती को चंपावत या दूसरे स्वास्थ्य केंद्र रेफर किया जाता है। पाटी और बाराकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर अन्य सरकारी अस्पताल में गर्भवती सहित अन्य महिलाओं के इलाज की खास व्यवस्था नहीं है। तीन जगह खुशियों की सवारी है, जहां से प्रसूता को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था जरूर है।
कोट
जिले में सिर्फ एक गायनाकोलॉजिस्ट होने से जिला अस्पताल पर दबाव रहता है। वैसे दोनों एसडीएच, पीएचसी और एएनएम केंद्र पर भी गर्भवती का इलाज कराया जा रहा है। दूरदराज से आने वाली गर्भवतियों और उनके तीमारदारों के लिए पीएचसी में व्यवस्था कराई गई है।
डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।