चंपावत जिले के भुतहा गांवों में शामिल स्वांला के म्वांला गांव की सच्चाई जल्द टीवी के रूपहले पर्दे पर लोगों को दिखाई जाएगी। इसके लिए मुंबई से एमटीवी की प्रोडक्शन टीम म्वांला गांव पहुंच कर शूटिंग करेगी। म्वांला गांव 25 फरवरी 1952 में हुई एक सड़क दुर्घटना के बाद से ही अभिशप्त हो गया था। तब देश में पहले लोकसभा चुनाव की सुरक्षा ड्यूटी में लगे पीएसी मेरठ बटालियन का एक वाहन म्वांला के समीप गहरी खाई में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में पीएसी के आठ जवानों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
बताया जाता है कि दुर्घटना के बाद से ही म्वांला गांव में विचित्र घटनाएं होने के साथ ही रात में रोने चिल्लाने की आवाजें ग्रामीणों को डराने लगीं। इस कारण खेती किसानी के लिए प्रसिद्ध म्वांला गांव के ग्रामीण एक एक कर गांव से पलायन कर गए और गांव वीरान होने के साथ ही भुतहा बन गया। आसपास के गांवों के ग्रामीण बताते हैं कि खौफ के कारण गांव में रात में कोई नहीं रहता है। पूर्व में म्वांला गांव में मंसूर की खेती काफी होती थी, लेकिन ग्रामीणों के गांव छोड़ देने से खेती किसानी पूरी तरह से चौपट हो गई। इस गांव के बारे में अब जल्द ही एमटीवी की ओर से लोगों को सच्चाई दिखाई जाएगी कि गांव के अभिशप्त होने के पीछे क्या कहानी है।
एमटीवी की ओर से नौ प्रतियोगियों के साथ तैयार किए जाएंगे 21 एपीसोड
म्वांला गांव को लेकर एमटीवी की ओर से पहली बार पैरा नार्मल एडवेंचर रियल्टी शो तैयार किया जाएगा। फिल्म निर्देशक रीना भाष्कर ने बताया कि रियल्टी शो में देश भर के नौ प्रतियोगियों के बीच 21 एपीसोड का फिल्मांकन किया जाएगा। इस दौरान प्रतियोगी लोगों के दिलों में भूत आदि के खौफ और डर को बाहर निकालेंगे। इसके लिए एमटीवी की 100 से 150 सदस्यीय प्रोडक्शन टीम शूटिंग के लिए म्वांला गांव में पहुंचेगी और शूटिंग पूरी होने तक गांव में ही रात्रि विश्राम करेगी।
पलायन रोकथाम योजना में शामिल होने पर भी आबाद नहीं हो सका म्वांला
चंपावत जिले का म्वांला गांव मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना में चयनित होने के बाद भी आबाद नहीं हो सका है। गांव में बिजली, पानी, सड़क आदि बुनियादी सुविधाओं का खासा अकाल है। इस कारण यहां से पलायन कर चुके ग्रामीणों ने कभी भी गांव को फिर से आबाद करने में रूचि नहीं दिखाई है।