चंपावत। कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्र के पहले गुलाबी शौचालय के लिए जमीन की कमी भारी पड़ गई है। वित्त वर्ष का आधा समय बीतने के बावजूद जमीन की तलाश शुरू नहीं हो सकी है। भूमि नहीं मिलने से चंपावत जिले में बनने वाला गुलाबी शौचालय लटक गया है।
कुमाऊं के चार (अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत) पहाड़ी जिलों में पहला गुलाबी शौचालय चंपावत जिले में बनाया जाना है। बालिकाओं और महिलाओं के उपयोग में आने वाले इस शौचालय में पुरुषों के प्रवेश पर मनाही होगी। महिलाओं के लिए पृथक शौचालय होने से दुश्वारी कम होगी। शौचालय को संचालित करने वाला पूरा स्टाफ भी महिलाओं का होगा। इसके लिए 2023-24 की जिला योजना में 20 लाख रुपये मंजूर हुए थे। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद वित्त वर्ष का आधा वक्त बीत जाने पर भी जिले के प्रवेशद्वार टनकपुर में आठ सीट वाले शौचालय के लिए जमीन ही नहीं तलाशी जा सकी।
इधर, जिला पर्यटन विकास अधिकारी अरविंद गौड़ का कहना है कि गुलाबी शौचालय के लिए टनकपुर में जमीन तलाशी जा रही है। इसके लिए नगर पालिका और राजस्व विभाग को पत्र लिखा गया है। लेकिन अभी जमीन नहीं मिलने से निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
डेढ़ दशक से कभी उपयोग में नहीं आया सिन्याड़ी शौचालय
चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिन्याड़ी में रोडवेज बस के दो अनुबंधित होटल हैं। बड़ी संख्या में रोडवेज बसों से लेकर जीप, कार और टैक्सिी भी रुकती हैं। यहां निर्मित शौचालय डेढ़ दशक से बंद है। सार्वजनिक शौचालय के पास झाडिय़ां और गंदगी का अंबार है।सीएम कैंप कार्यालय के नोडल अधिकारी केएस बृजवाल का कहना है कि इस शौचालय की खामियों को दूर कर जल्द संचालित करवाया जाएगा। संवाद