देवीधुरा/पाटी (चंपावत)। मां बाराही धाम देवीधुरा में आषाड़ी कौतिक के दिन बृहस्पतिवार को फल-फूलों से खेली जाने वाली बगवाल के लिए खोलीखांड दुबाचौड़ा का मैदान सजकर तैयार हो गया है। बगवाल में चार खाम (चम्याल, गहड़वाल, लमगड़िया और वालिग) और सात थोक के योद्धा शिरकत करेंगे। बगवाल शुभ मुहूर्त के अनुसार दोपहर एक बजे के बाद शुरू होगी। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शिरकत करेंगे। इस दौरान महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, लोहाघाट के विधायक खुशाल सिंह अधिकारी, जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति राय सहित कई हस्तियां भी मौजूद रहेंगी।
डीएम नवनीत पांडे और एसपी देवेंद्र पींचा ने बताया कि बगवाल की सभी तैयारी पूरी कर ली गई हैं। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के अलावा सीसीटीवी से भी नजर रखी जाएगी। मेला मजिस्ट्रेट रिंकू बिष्ट और मेलाधिकारी जिला पंचायत के एएमए भगवत पाटनी व्यवस्थाओं पर नजर रखे हुए हैं।
सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि बगवाल में चोटिल होने वाले योद्धाओं के तुरंत इलाज के लिए चिकित्सा शिविर लगाया जाएगा। बगवाल के दिन देवीधुरा और पाटी की शराब की दुकानें बंद रहेगी। जिला आबकारी अधिकारी तपन कुमार पांडेय ने बताया कि देवीधुरा और पाटी की शराब की दुकानों को रात को सील कर दिया गया। बगवाली वीर खास रंग के साफे पहनेंगे। गहड़वाल खाम के योद्धा केसरिया, चम्याल खाम के योद्धा गुलाबी, वालिग खाम के सफेद और लमगड़िया खाम के योद्धा पीले रंग के साफे पहनकर बगवाल खेलेंगे।
फोटो 30 सीपीटी 20पी व 21पी (मां बाराही देवी की मूर्ति व मंदिर)
बगवाल है नरबलि का विकल्प
देवीधुरा/पाटी। क्षेत्र में रहने वाले चार प्रमुख खाम चम्याल, वालिग, गहड़वाल और लमगड़िया खाम के लोग पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना कर एक-दूसरे को बगवाल का निमंत्रण देते हैं। मान्यता के मुताबिक पूर्व में यहां नरबलि दिए जाने का रिवाज था लेकिन जब चम्याल खाम की एक वृद्धा के इकलौते पौत्र की बलि की बारी आई तो वंशनाश के डर से उसने मां बाराही की तपस्या की। देवी मां के प्रसन्न होने पर वृद्धा की सलाह पर चारों खामों के मुखियाओं ने आपस में युद्ध कर एक मानव बलि के बराबर रक्त बहाकर पूजा करने की बात स्वीकार ली। तभी से बगवाल खेली जा रही है। वर्ष 2012 तक इसे पत्थरों से खेला जाता था। उसके बाद से यह फल-फूलों से खेली जाने लगी। संवाद
निकेत के साथ रह रहे हैं बगवाली वीर
देवीधुरा/पाटी। मां बाराही धाम में बगवाल खेलने वाले योद्धाओं ने 29 अगस्त से निकेत (पूर्ण शुद्धता के साथ रहना) शुरू किया है। इसके अंतर्गत एक समय भोजन के साथ संयम और नियमों का पालन किया जाता है। वहीं बुधवार को विशेष पूजा-अर्चना हुई। मंदिर के पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ शास्त्री ने पूजा-अर्चना की रस्म निभाई। पूजा में चारों खाम के प्रतिनिधियों सहित कई श्रद्धालु शामिल रहे। आयोजन में पंडित भुवन जोशी आदि ने सहयोग किया। संवाद
महाशक्तिपीठ गबोरी में हुई पूजा-अर्चना
देवीधुरा/पाटी। मां बाराही धाम देवीधुरा के महाशक्तिपीठ में पूजा-अर्चना की गई। बुधवार को नित्य पूजा के साथ चार खाम, सात थोक के प्रतिनिधियों ने गौरी पूजन, भीम शिला, महाकाली, कलवा और मां बाराही की पूजा की गई। पीठाचार्य भुवन जोशी, पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी, मंदिर के पुजारी महादेव, मुख्य सेवक चतुर सिंह के साथ चारों (गहड़वाल खाम के त्रिलोक सिंह बिष्ट, चम्याल खाम के गंगा सिंह, वालिग खाम के बद्री सिंह और लमगडिय़ा खाम के वीरेंद्र सिंह लमगड़िया) खामों के मुखिया मौजूद रहे। संवाद
यह धरती है बगवाली वीरों के स्वाभिमान की...
शहीद नंदन सिंह चम्याल की स्मृति में कवि सम्मेलन
देवीधुरा/पाटी। मां बाराही धाम में शहीद नंदन सिंह चम्याल की स्मृति में बुलंदी संस्था के तत्वावधान में राष्ट्रीय सनातन जागरण सेवा ने कवि सम्मेलन किया। सम्मेलन के संयोजक दीपक सिंह बिष्ट ने शुभारंभ कविता अंग्रेज हुकूमत के आगे झुकी नहीं कभी, यह धरती है बगवाली वीरों के स्वाभिमान की... से किया।
बागेश्वर के मुनिप्रताप राणा ने बाबा बागेश्वर को पाकर भारत की धन्य हुई धरती..., नोएडा के कमल आग्नेय ने श्रीराम नहीं होते तो देश नहीं होता..., बाजपुर के शायर विवेक बादल बाजपुरी ने बाबूजी जो इस दुनिया में नहीं रहे, घर का अगला हिस्सा टूट गया... कविता से वाहवाही लूटी। कार्यक्रम में शेखर त्रिपाठी, हरीश शर्मा, नवीन आर्या आदि कवि मौजूद थे। सम्मेलन में ब्लॉक प्रमुख सुमनलता, मंदिर कमेटी के अध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, कीर्ति बल्लभ जोशी, भुवन चंद्र जोशी, चेतन चम्याल, त्रिभुवन चम्याल, ईश्वर बिष्ट, दिनेश चम्याल आदि मौजूद थे। संवाद
शिविर में 20 यूनिट से अधिक हुआ रक्तदान
देवीधुरा/पाटी। देवीधुरा के मां बाराही मंदिर परिसर में बुधवार को लगे शिविर में 20 लोगों ने रक्तदान किया। शिविर में लैब तकनीशियन उमेद सिंह बसेड़ा, मनोज मेहता, फार्मासिस्ट योगेश कन्नौजिया, नवीन गोस्वामी, प्रकाश खड़ायत, विकास थ्वाल आदि मौजूद थे। संवाद