अंतिम संस्कार को करना पड़ा चार दिन का इंतजार दिल्ली में ११ अप्रैल को हुआ था अविवाहित पंडित घनश्याम भट्ट का निधन लॉकडाउन के चलते दूसरे राज्य के लिए जाने की अनुमति में लगा वक्त धौन गांव से गए भतीजे ने मंगलवार को किया अंतिम संस्कार अमर उजाला ब्यूरो
चंपावत। धौन के मूल निवासी पंडित घनश्याम भट्ट (65) की मौत 11 अप्रैल को दिल्ली में हो गई थी लेकिन लॉकउाउन की वजह से उनका अंतिम संस्कार चार दिन बाद हो सका। स्वर्गीय भट्ट लंबे समय से दिल्ली में ही पूजा-अर्चना का कार्य कराते थे। अविवाहित होने की वजह से वे दिल्ली में अकेले रहते थे। पंडित घनश्याम भट्ट का दिल्ली के एक अस्पताल में 11 अप्रैल को निधन हुआ। उनके परिचितों ने धौन में रहने वाले उनके भतीजे भुवन भट्ट को फोन से जानकारी दी। कोरोना वायरस के चलते जारी लॉकडाउन के चलते किसी दूसरे राज्य में जाने के लिए इजाजत की औपचारिकता में वक्त लग गया। पूर्व जिला पंचायत सदस्य गोविंद सामंत की मदद से उन्हें दिल्ली जाने की 13 अप्रैल को अनुमति मिली। 14 अप्रैल शाम को वे दिल्ली पहुंचे। तब जाकर चौथे दिन अंतिम संस्कार की रस्म पूरी हुई। बुधवार को जिले में आने पर भतीजे भुवन भट्ट और उनके साथ गए एक अन्य परिजन को प्रशासन क्वारंटीन कर रहा है। परिजनों का कहना है कि उन्हें अपने चाचा की अंतिम क्रिया का संस्कार करना है। ऐसे में क्वारंटीन के स्थान पर वे पीपलपानी होने तक खुद-ब-खुद होम क्वारंटीन में रहेंगे। इधर डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय का कहना है कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी है। फिर भी इस मामले में मानवीय नजरिए से जो भी जरूरी होगा, किया जाएगा। पंडित घनश्याम भट्ट (फाइल फोटो)