लोहाघाट (चंपावत)। देवी रथ के मंदिर की परिक्रमा के बाद पांच दिनी देवीधार महोत्सव का समापन हो गया है। देवडांगरों ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। शांति व्यवस्था के लिए पुलिस ने पुख्ता व्यवस्था की थी।
सोमवार सुबह से देवीधार मंदिर में पूजा अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ लगनी शुरू हो गई। सुहावने मौसम के बीच शाम करीब 3ः50 बजे दुर्गम खड़ी चढ़ाई पार करते हुए सबसे पहले कलीगांव के देवीरथ ने मंदिर की परिक्रमा की। रथ में सवार मां भगवती के रूप में नारायण पुजारी और महाकाली के रूप में हरुली देवी विराजमान रहीं। करीब 4ः30 बजे डैंसली गांव से मां भगवती का डोला मंदिर पहुंचा। इसमें भगवती के रूप में करन देऊपा और महाकाली रतन सिंह विराजमान थे। पांच बजे अंत में दो किमी दुर्गम रास्तों को पार कर रायनगर चौड़ी का देवीरथ मंदिर पहुंचा। इसमें भगवती के रूप में हरीश कापड़ी और गीता देवी और महाकाली के रूप में गीता राय रथ में सवार होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दे रही थी। देव रथ के पीछे महिलाएं मंगल गान कर रहीं थीं। देवीधार विकास समिति के अध्यक्ष जीवन मेहता ने सभी का आभार जताया।
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अखिलतारिणी मंदिर में हुई पूजा अर्चना
लोहाघाट के अखिलतारिणी मंदिर में देवी रथ यात्रा निकाली गई। सोमवार को सुबह अखिलतारिणी मंदिर में पंडित हरीश पांडेय ने पूजा संपन्न करवाई। मेले में लोहाघाट, टनकपुर नायकगोठ के लोगों ने मेले में भंडारे का आयोजन किया। अखिलतारणी मंदिर समिति के अध्यक्ष दीपक जोशी, संजय पांडेय, योगेश रंसवाल, लक्ष्मण सिंह, राहुल सिंह,हरीश जोशी, पीयूष जोशी,मान सिंह, अनिल जोशी, रोशन सिंह, नीरज सिंह, शुभम सिंह, दीवान सिंह, प्रकाश सिंह, राम सिंह आदि मौजूद रहे। संवाद