टनकपुर (चंपावत)। चंपावत जिले की नेपाल सीमा से लगी एसएसबी की सभी बीओपी (बाॉर्डर आउटपोस्ट) में अगले साल उजाला हो जाएगा। बिजली विहीन दस बीओपी को बिजली सुविधा से जोड़ने का काम शुरू हो गया है। इससे एसएसबी कर्मियों को सुविधा मिलेगी। दिसंबर 2024 तक काम पूरा करा लिया जाएगा। इस वक्त इन चौकियों में सौर ऊर्जा से बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
चंपावत जिले में एसएसबी की पंचम वाहिनी की नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में बूम से पंचेश्वर तक कुल 19 बीओपी हैं लेकिन इनमें से महज नौ चौकियों में ही बिजली है। दस चौकियां बगैर बिजली के हैं। सीमांत क्षेत्र के कई ग्रामीण क्षेत्रों में 2012 में बिछाई गई बिजली लाइन एक साल बाद यानी 2013 की आपदा में ध्वस्त हो गई थी। सीमावर्ती क्षेत्रों में अंधेरे से हो रही परेशानी को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बजट मंजूर किया।
एसएसबी से 3.83 करोड़ रुपये मिलने के बाद विद्युतीकरण के लिए निविदा काम पूरा होने के बाद अब बृहस्पतिवार से ऊर्जा निगम ने काम शुरू करा दिया है। 17 किमी लंबी लाइन काली नदी के किनारे बिछाई जाएगी। बिजली के खंभे लगाने का काम शुरू हो गया है। अब तक 12 खंभे लगाए जा चुके हैं। संवाद
यह चौकियां होंगी रोशन
श्रीकुंड, चामीगाड़, पूर्णागिरि, कलढुंगा प्रथम, कलढुंगा द्वितीय, चूका, सीम, खेत, आमड़ा और ब्यूरी बॉर्डर आउटपोस्ट।
कोट
निविदा प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद एसएसबी की दस चौकियों को विद्युतीकृत करने का काम शुरू हो गया है।
मयंक भट्ट, एई, ऊर्जा निगम, टनकपुर।