चंपावत। नेपाल से लगी सीमा पर सुरक्षा में लगी एसएसबी की बाॅर्डर आउटपोस्ट दिसंबर 2024 तक रोशन हो जाएगी। बिजली विहीन इन दस बीओपी पर अगस्त से काम शुरू हो जाएगा। बीओपी में उजाला होने के बाद दूसरे चरण में नेपाल सीमा से लगे गांवों में भी बिजली लाइन बिछाई जाएगी।
सीमांत के सीम, खेत, रियासी बमनगांव, चूका, श्रीकुंड, कलढुंगा, गंगसीर, खिरद्वारी, कलसुनिया, चामी, आमड़ा, ब्यूरी आदि गांवों में 2012 में लाइन, खंभे और ट्रांसफार्मर लगने के बावजूदं बिजली का उजाला नहीं हो सका। आपदा में लाइन और खंभों को भारी नुकसान होने और फिर लाइन के खराब होने से ये नौबत आई। अलबत्ता अब इन सीमावर्ती क्षेत्रों में फिर से बिजली लाइन बिछाई जाएगी। पहले चरण में एसएसबी की दस (श्रीकुंड, चामीगाड़, पूर्णागिरि, कलढुंगा प्रथम, कलढुंगा द्वितीय, चूका, सीम, खेत, आमड़ा और ब्यूरी) बीओपी को विद्युतीकृत किया जाएगा। 17 किमी लंबी ये लाइन टनकपुर-जौलजीबी सड़क के किनारे होते हुए बिछाई जाएगी। इसके बाद सीमांत क्षेत्र के गांवों को विद्युतीकृत किया जाएगा। इसके लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यहां बिजली की आपूर्ति ऊधमसिंह नगर जिले के लोहियाहेड पावर स्टेशन से की जाएगी। पहाड़ के बजाय मैदान से आपूर्ति होने से लाइन को नुकसान पहुंचने का खतरा भी कम होगा।
99 तोकों में नहीं है ग्रिड की बिजली
चंपावत। जिले के 99 तोकों में ग्रिड की बिजली नहीं है। विषम भौगोलिक हालात वाले ये तोक नदी, घने जंगल के ईद-गिर्द हैं। इन तोकों के 852 घरों को दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत सौर ऊर्जा के जरिए विद्युतीकृत किया गया है लेकिन धूप कम होने पर सौरप्लेट के चार्ज नहीं होने से उजाला नहीं हो पाता है।
कोट
विद्युतीकरण के लिए एसएसबी ने 3.75 करोड़ रुपये ऊर्जा निगम को दे दिए हैं। पहले चरण में नेपाल सीमा से लगी एसएसबी की दस बीओपी का विद्युतीकरण होगा। निविदा प्रक्रिया दो महीने में पूरी होने के बाद काम शुरू कर लिया जाएगा। -उमाकांत चतुर्वेदी, ईई, ऊर्जा निगम, चंपावत।