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भविष्य गढ़ने के कर्म से शिक्षक धर्म निभा रहे प्रधानाचार्य डॉ. एसपी गंगवार

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टनकपुर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक डॉ. अमित अग्रवाल। संवाद - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। वे सच्चे अर्थ में शिक्षक हैं। स्कूल के अंदर भी और स्कूल परिसर से बाहर भी। जीआईसी रमक के प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. सुरेंद्र पाल गंगवार शिक्षक से लेकर गुरु तक के इस धर्म को अपने कर्म से निभा रहे हैं। अधिक अंक पाने पर छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत कर पढ़ने की आदत डालने के लिए भी वह प्रेरित कर रहे हैं। पढ़ाई में छात्र-छात्राओं की रुचि बढ़ाने के लिए उन्होंने स्कूल की दीवारों को मानचित्रों से सजाया है। उन्होंने 17 साल के कार्यकाल में दूरस्थ क्षेत्रों में ही सेवा कर उदाहरण पेश किया है।
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चंपावत से 79 किमी दूर रमक बेहद पिछड़ा क्षेत्र है। भूगोल के प्रवक्ता डॉ. गंगवार इस कॉलेज में वर्ष 2011 से सेवा दे रहे हैं। अपने विषय को पढ़ाने के साथ ही वह वर्ष 2019 से प्रभारी प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। उनके और अन्य शिक्षकों के प्रयासों से कॉलेज में इस साल इंटर बोर्ड परीक्षा का परिणाम 100 प्रतिशत रहा।
भूगोल विषय में विद्यार्थियों की दिलचस्पी और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए उन्होंने 70 प्रतिशत अंक लाने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया। इसके तहत 500 रुपये, स्वेटर, पुस्तकें दी जा रहीं हैं। वर्ष 2013 से शुरू इस योजना के कारण भूगोल में पहले साल तीन, दूसरे साल पांच छात्रों के 70 प्रतिशत से अधिक अंक आए। अब ये संख्या 11 तक पहुंच गई है।
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ऊधमसिंह नगर जिले के निवासी डॉ. गंगवार स्कूल परिसर की दीवारों के जरिये भी छात्र-छात्राओं को सीख दे रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान इन दीवारों पर उन्होंने पृथ्वी, भारत, उत्तराखंड के मानचित्र खुद बनाए। इससे छात्र-छात्राओं को सहजता से भौगोलिक ज्ञान मिला और उनकी जिज्ञासा भी बढ़ी। अगस्त में हुई प्रधानाचार्यों की बैठक में सीईओ जितेंद्र सक्सेना ने इसके लिए उनकी सराहना की। अन्य शिक्षकों को भी उनके कार्यों से प्रेरणा लेने की नसीहत दी। अपने 17 साल के कार्यकाल की शुरुआत उन्होंने पिथौरागढ़ जिले के डोर स्कूल से की।
निदेशक डॉ. अग्रवाल ने चार साल में संवार दिया इंजीनियरिंग कॉलेज
टनकपुर (चंपावत)। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी संस्थान के पहले निदेशक डॉ. अमित अग्रवाल संस्थान को कम समय में संवारने में जुटे हैं। वर्ष 2015 से शुरू इस संस्थान में पाठ्यक्रम बढ़ाने से लेकर शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के काम में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई है। पिछले दो साल से यहां छात्र-छात्राओं को कैंपस साक्षात्कार के जरिये रोजगार और उच्च शिक्षा के मौके मिल रहे हैं। इन प्रयासों के लिए उन्हें पिछले महीने उत्तराखंड रत्न से सम्मानित किया जा चुका है।
बीटेक यांत्रिकी और सिविल इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम से शुरू इस राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में निदेशक न होने पर विद्यार्थियों को परेशानियां झेलनी पड़ीं। उन्हें प्रायोगिक कार्य से लेकर पढ़ाई तक के लिए पिथौरागढ़ और अन्य दूसरे इंजीनियरिंग कॉलेज में जाना पड़ा। नवंबर 2018 में निदेशक के रूप में यहां सेवा शुरू करने के बाद डॉ. अमित ने इस स्थिति को तेजी से सुधारा।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से मान्यता मिलने के बाद वर्ष 2021 से बीटेक कंप्यूटर इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम शुरू हुआ, तो इस साल दो नए पाठ्यक्रम बीटेक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स एंड ऑटोमेशन शुरू किए गए। निदेशक ने विश्व बैंक के अनुदान से उच्च स्तरीय प्रयोगशालाओं से लेकर उपकरण, फर्नीचर आदि आधारभूत सुविधाएं बढ़ाईं।

रमक जीआईसी के प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. एसपी गंगवार।- फोटो : CHAMPAWAT

रमक जीआईसी में इस तरह दीवारों को सजा छात्रों को प्रेरणा दे रहे डॉ. एसपी गंगवार। संवाद न्यूज एजेंस?- फोटो : CHAMPAWAT

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