चंपावत। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुपालन में शासनादेश जारी होने के बावजूद बनबसा के लोगों की एक अदद स्टेडियम की आस पूरी नहीं हो सकी है। स्टेडियम बनाने का काम शुरू होना तो दूर, जमीन का हस्तांतरण भी खेल विभाग को नहीं हो सका है।
ऊधमसिंह नगर जिले की सीमा से लगा चंपावत जिले के प्रवेशद्वार बनबसा के लिए स्टेडियम की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक सितंबर 2021 को घोषणा की थी। इसे पूरा कराने के लिए प्रशासन ने बनबसा में 0.960 हेक्टेयर पर बने कच्चे मैदान की जमीन को स्टेडियम के लिए उपयुक्त पाते हुए चयनित किया था लेकिन एलान के 14 माह बाद भी चयनित जमीन खेल विभाग को हस्तांतरित नहीं हो सकी है। इसी कारण स्टेडियम बनाने में देरी हो रही है।
बनबसा में स्टेडियम के लिए चिह्नित भूमि को वन भूमि से मुक्त कराने का प्रस्ताव ऑनलाइन किया गया था लेकिन कुछ खामियां मिलने के कारण प्रस्ताव लौटा दिया गया। भूगर्भ रिपोर्ट और ले आउट प्लान के साथ प्रस्ताव को वन विभाग के नोडल अधिकारी के पास भेजा गया है। - बीसी पंत, जिला क्रीड़ाधिकारी, चंपावत।
चंपावत स्टेडियम के लिए भी नहीं मिल सकी जमीन
चंपावत। चंपावत में भी स्टेडियम बनाने के लिए जमीन नहीं मिल सकी है। यहां गोरलचौड़ मैदान को बढ़ाकर स्टेडियम बनाने का विकल्प भी खत्म हो गया है। गोरलचौड़ मैदान से लगी सेना की जमीन की अदला-बदली के प्रयास बेनतीजा रहने से ये नौबत आई है।
तीन मुख्यमंत्रियों ने चंपावत में स्टेडियम बनाने की घोषणा की थी। सबसे पहले वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी, फिर 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और वर्ष 2016 में तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने यह घोषणा की थी।
गोरलचौड़ मैदान के पास की सेना की 77 नाली जमीन खेल विभाग को हस्तांतरित करने की कवायद अदलाबदली की कोशिश बेनतीजा रही। बाद में सेना की ओर से मैदान से लगी अपनी जमीन पर अपने स्वामित्व के साइनबोर्ड लगा दिए गए हैं। जिला क्रीड़ाधिकारी बीसी पंत का कहना है कि जमीन न मिल पाने से चंपावत में स्टेडियम नहीं बन सका है।