पूर्णागिरि धाम के अखंड धूनी स्थल में पूजन करते पंडित। संवाद
पूर्णागिरि धाम (चंपावत)। भैरव मंदिर के पास स्थित अखंड धूनी मां पूर्णागिरि धाम की यात्रा का अहम पड़ाव है। 2022 में हुए नव निर्माण के बाद से इस पुरातन धूनी स्थल को आधुनिक रूप दिया गया। शारदीय नवरात्र में यहां उपवास के साथ पूजा-अर्चना चल रही है। मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी का कहना है कि रविवार को विशेष पूजन के बाद भंडारा कराया जाएगा।
धाम में इस अखंड धूनी का खास महत्व है। ये धूनी 2021 तक दूसरी जगह पर प्रज्वलित होती थी। आपदा की वजह से पिछले साल इसे सुरक्षित रखने के लिए भैरव मंदिर के पास नए भवन में स्थानांतरित किया गया। मंदिर समिति का कहना है कि धूनी से लगाई जाने वाली भभूत शिशुओं सहित अन्य श्रद्धालुओं के लिए कल्याणकारी बताई गई है। काली मंदिर, भैरव मंदिर और सिद्धबाबा के दर्शन की तरह ही धूनी का टीका माथे पर लगाने से मनोकामना पूरी होती है।