चंपावत। जिले में एक से सात किमी तक से भी अधिक की दूरी तय कर पैदल स्कूल पहुंचने वाले बच्चों को साथी (एस्काॅर्ट) मिलने जा रहा है। समग्र शिक्षा की ओर से छितरे और असीमित बस्तियों में रहने वाले ऐसे बच्चों का चयन किया जा रहा है। इस दायरे में आने वाले 400 से भी ज्यादा बच्चों को अब अकेले पैदल स्कूल नहीं जाना पड़ेगा। इन बच्चों को घर से स्कूल और स्कूल से घर तक सकुशल पहुंचने में एस्काॅर्ट की जिम्मेदारी तय होगी।
समग्र शिक्षा की ओर से जिले के प्राथमिक कक्षाओं में दूरस्थ क्षेत्र से पैदल आने वाले स्कूली बच्चों को एस्काॅर्ट सुविधा मिलेगी। एक से पांच तक की कक्षाओं के लिए एक किमी से अधिक पैदल, जूनियर की छह से आठवीं कक्षाओं के लिए तीन किमी से अधिक, हाईस्कूल की नौवीं और 10वीं कक्षा के लिए पांच किमी से अधिक और इंटरमीडिएट की 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को विद्यालय तक पहुंचाने के लिए सात और सात किमी से अधिक की पैदल दूरी तय करने के लिए एस्कार्ट की सुविधा जल्द दी जाएगी। इसमें 348 प्राथमिक और 70 बच्चे माध्यमिक शिक्षा के शामिल हैं। इन बच्चों के अभिभावकों को एस्काॅर्ट सुविधा के लिए 10 माह की अवधि तक के लिए 6000 रुपये दिए जाएंगे। इसके लिए ब्लॉक स्तर पर ऐसे बच्चों को चिन्हित कर सूचना मांगी जा रही है।
स्कूल तक पहुंचाने वाला भरोसेमंद साथी
चंपावत। समग्र शिक्षा के अनुसार एस्काॅर्ट का मतलब स्कूली बच्चों को अनुरक्षक के रूप में साथ जाना है। यह एक ऐसी सेवा है, जिसमें संबंधित व्यक्ति के साथ समय बिताने के बदले उसे भुगतान करना होता है। बच्चे सुरक्षित एस्काॅर्ट के भरोसे घर से स्कूल और स्कूल से घर तक पहुंचेंगे। इससे अभिभावकों को उनकी चिंता भी कम रहेगी।
कोट
प्रदेश के साथ ही जिले के छितरे और असीमित बस्ती के निवासरत 418 स्कूली बच्चों को 10 माह तक एस्कार्ट की सुविधा के तहत 6000 रुपये की धनराशि दी जाएगी। एस्काॅर्ट सुविधा के लिए ब्लॉक स्तर पर छात्र-छात्राओं की सूची तैयार की जा रही है। 10 माह तक एस्काॅर्ट सेवा बच्चों को दी जाएगी।
- जसवंत सिंह पोखरिया, जिला समन्वयक समग्र शिक्षा, चंपावत।