चंद्रशेखर जोशी
चंपावत। बैंक विहीन ग्रामीण क्षेत्रों में जल्द ही चलता फिरता बैंक संचालित होने लगेगा। यह जिम्मेदारी बैंक सखी निभाएंगी। जिले में पहली बार बैंक सखी इस काम को करेंगी। इससे दूरदराज के ग्रामीण इलाकों की दिक्कतें कम होंगी।
चंपावत जिले के शहरी क्षेत्रों में बैंक की कई शाखाएं है लेकिन गांवों की तस्वीर इसके एकदम उलट है। नेपाल सीमा से लगे इलाकों से लेकर अधिकांश दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्र बैंकिंग सुविधा से वंचित हैं। यहां तक की कई ऐसे ग्रामीण क्षेत्र हैं जहां से बैंक तक पहुंचने के लिए 25 से 50 किमी की दूरी तय करने की मजबूरी है।
ऐसे क्षेत्रों में अब बैंक सखी ग्रामीणों के लिए मददगार बनेंगी। संबंधित ग्रामीण क्षेत्रों की 30 महिलाओं को प्रशिक्षित करने के बाद ये जिम्मेदारी दी जाएगी। एसबीआई ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक प्रांशु मैठानी ने बताया कि न्यूनतम हाईस्कूल पास महिलाओं को संस्था की ओर से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संवाद
बैंकों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
-चंपावत जिले में 20 बैंक की कुल 65 शाखाएं हैं। 53 शाखाएं शहरी क्षेत्रों में हैं।
-चंपावत जिले में औसतन 4615 लोगों पर बैंक की एक शाखा है।
-जिले के 85 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में महज बैंक की सिर्फ 12 शाखाएं हैं।
-जून 2023 तक जिले के साढ़े चार लाख खाताधारकों की कुल जमा राशि 2810 करोड़ रुपये है।
-बैंक विहीन कुछ इलाकों में 82 बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट हैं।
इन ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
गुमोद, रमक, मल्ला बापरू, मंगोली, गहतोड़ा, नघान, चौड़ासेठी, मुडिय़ानी, गोली मंगलपुर, पम्दा, डुमडाई, गुरेली, चौड़ाकोट, कनियाना, इजड़ा, कनवाड़, डुंगरालेटी, गागर, नाकोट, कूंण, दुधौरी, जाख, कोट, पोलप, मिर्तोला, डोबाभागू, थ्वालखेड़ा, गैडाखाली, हनुमानगढ़ी और आनंदपुर।
कोट
पांच किमी की हवाई दूरी तक के गांवों में बैंकिंग सुविधा देने की कवायद की जा रही है। इसके लिए बैंक विहीन क्षेत्रों में बैंक सखी की तैनाती की जाएगी। शुरुआत में इस काम में एनआरएलएम भी मदद करेगा। बैंक सखी गांवों में बैंक खाता खोलने, राशि जमा करने, भुगतान करने सहित अन्य सुविधाएं ग्रामीण उपभोक्ताओं को देंगी। - अमर सिंह ग्वाल, लीड बैंक प्रबंधक, चंपावत।
फोटो - 26 सीपीटी 10पी।