चंद्रशेखर जोशी
चंपावत। मां पूर्णागिरि धाम में मार्च से जून तक तीन माह का सरकारी मेला वर्ष 2024 से सालभर का हो जाएगा। इसके लिए सुविधाओं काे भी सुधारा जा रहा है। ठुलीगाड़ से भैरव मंदिर तक साढ़े छह किमी लंबी सिंगल लेन सड़क को चौड़ा कर टू-लेन में बदलने की कवायद शुरू कर दी गई है। इससे श्रद्धालुओं का सफर सहूलियत भरा होगा।
पूर्णागिरि मंदिर टनकपुर से 22 किमी दूर है। इस मंदिर में हर साल 45 लाख से अधिक श्रद्धालु आते हैं। ठुलीगाड़ तक 12 किमी चलने के बाद वाहनों की गति कम हो जाती है। इसका कारण ठुलीगाड़ से भैरव मंदिर तक की सड़क की चौड़ाई कम होना है। इससे आवाजाही में अधिक समय लगता है और जोखिम भी बढ़ जाता है। वाहनों की धीमी गति की वजह से ट्रैफिक जाम लगना भी आम बात है।
धाम में सुविधाओं के विस्तार के लिए सड़क सुधारने के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा को विभागीय मंजूरी मिल गई है। अब इस सड़क की चौड़ाई तीन गुनी की जाएगी। इसके लिए लोनिवि ने सर्वे, भूमि अधिग्रहण और अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सड़क का काम डेढ़ साल में पूरा कर लिया जाएगा। सड़क चौड़ी होने से देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालु सुरक्षित और आरामदायक सफर कर सकेंगे।
सड़क से संबंधित तथ्य
1. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 21 अप्रैल 2022 को ककरालीगेट-ठुलीगाड़-भैरव मंदिर सड़क को राज्यमार्ग घोषित किया।
2. राज्यमार्ग-108 के रूप में 20 सितंबर 2022 को मंजूरी मिली।
3. मानसखंड परियोजना के तहत पूर्णागिरि धाम को विकसित करने के लिए सड़क चौड़ी कर तीर्थ यात्रियों को सुविधा देने की घोषणा।
4. शासन से मंजूरी के बाद लोनिवि की कार्यवाही शुरू।
5. 6.640 किमी लंबी ठुलीगाड़-भैरव मंदिर सड़क की चौड़ाई 5.50 मीटर है। इसे बढ़ाकर 18 मीटर किया जाएगा।
ठुलीगाड़-भैरव मंदिर सड़क को सिंगल लेन से टू-लेन में बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। पहले चरण में सर्वे और भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही होगी। नाप जमीन का मुआवजा दिया जाएगा जबकि वन भूमि के प्रपत्र तैयार कर वन विभाग को भेजे जाएंगे। इसके लिए 16 सितंबर को निविदा खोली जाएगी। दूसरे चरण में डीपीआर बनेगी। - लक्ष्मण सिंह सामंत, एई, लोनिवि, टनकपुर।
पौने चार करोड़ रुपये से होगा स्थायी पथ प्रकाश
चंपावत। मां पूर्णागिरि धाम की बिजली व्यवस्था भी अब सालभर की होगी। पौने चार करोड़ रुपये से ये काम कराया जाएगा। टनकपुर के ककरालीगेट से पूर्णागिरि धाम तक यात्रा मार्ग पर स्थायी पथप्रकाश व्यवस्था से श्रद्धालुओं को सुविधा होगी। टनकपुर से पूर्णागिरि धाम क्षेत्र की चार ग्राम पंचायतों को भी फायदा होगा। मेले के दौरान की जानी वाली अस्थायी व्यवस्था पर तीस लाख रुपये से अधिक का खर्च भी बच जाएगा। ऊर्जा निगम चंपावत खंड के ईई उमाकांत चतुर्वेदी का कहना है कि ककरालीगेट से पूर्णागिरि धाम तक पथप्रकाश की स्थायी व्यवस्था के लिए सर्वे और देखरेख की जिम्मेदारी लेने वाली एजेंसी के चयन के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।
आंवलाघाट में पुल बनाने को मिली वित्तीय स्वीकृति
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। आंवलाघाट में रामगंगा नदी पर पुल बनाने के लिए शासन से वित्तीय स्वीकृति मिल गई है। इस पुल के बनने के बाद गंगोलीहाट से जिला मुख्यालय की दूरी 25 किलोमीटर कम हो जाएगी। पुल निर्माण के लिए वित्तीय स्वीकृति मिलने से क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर है।
वर्ष 2006 में रामगंगा पर माेटर पुल स्वीकृत हुआ था। डेढ़ दशक से अधिक समय में दोनों ओर सड़क भी कट चुकी है लेकिन पुल निर्माण के लिए धनराशि स्वीकृत नहीं हो पा रही थी। अब पुल निर्माण की वित्तीय स्वीकृति का पत्र संयुक्त सचिव श्याम सिंह की ओर से लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता सहित सभी खंडों को भेजा गया है।
पुल बनने के बाद गंगोलीहाट से जिला मुख्यालय की दूरी 25 किमी कम हो जाएगी। भेरंग पट्टी के लोग एक घंटे में जिला मुख्यालय पहुंच जाएंगे। रामगंगा पर पुल बनने से भेरंग पट्टी के 20 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा। रामगंगा घाटी पर बसे गांव के लोगों के लिए तहसील और जिला मुख्यालय की दूरी लगभग बराबर हो जाएगी। वर्तमान में गंगोलीहाट से जिला मुख्यालय की दूरी 78 किमी है। पुल बनने के बाद मुख्यालय से यह दूरी मात्र 52 किमी ही रहेगी। इससे कार्य के चलते जिला मुख्यालय जाने वाले लोगों का समय और धन दोनों की बचत होगी।