पाटी। पुरातन काल से चली आ रही बगवाल का इस वर्ष कुछ नया अंदाज देखने को मिला। दोपहर में खोलीखाड़ दुबाचौड़ में सर्वप्रथम गहड़वाल खाम के कुछ योद्धा परिक्रमा करते हुए अपने छोर की तरफ गए। फिर तीनों खामों ने परिक्रमा पूरी कर अपनी-अपनी जगह मोर्चा संभाला लेकिन सबसे बड़ी खाम गहड़वाल खाम के आधे से अधिक योद्धा मां के गर्भ गृह की परिक्रमा कर रहे थे। उस समय मैदान में उपस्थित बिना गहड़वाल खाम के योद्धाओं के आने से पूर्व ही खामों ने एक-दूसरे पर फल और फूल के साथ पत्थरों की बौछार शुरू कर दी। गहड़वाल खाम के युवा योद्धाओं ने इसका विरोध किया। इस कारण बगवाल को एक मिनट के लिए फिर से शुरू किया गया। अंत में गहड़वाल खाम के योद्धा मंदिर कमेटी के पास जाकर इसका विरोध करने लगे। गहड़वाल खाम के प्रतिनिधि दीपक बिष्ट और पीठाचार्य कीर्ति बल्लभ जोशी के समझाने के बाद बगवाल योद्धाओं को समझाकर शांत कराया। संवाद