चंपावत। जिलेे के गुमदेश क्षेत्र की 40 ग्राम पंचायतों के पशुपालकों को पशुधन प्रसार अधिकारी नहीं होने के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पशुपालकों को पशुओं के उपचार के लिये 30 से 40 किमी दूर लोहाघाट के पशु चिकित्सालय की सेवाएं लेनी पड़ रही हैं। हालांकि पशुपालन बिभाग की ओर से सीमांत क्षेत्र के पुलहिंडोला, मडलक और रौंसाल में पशु सेवा केंद्र तो खोले गए हैं, लेकिन वहां पशुधन प्रसार अधिकारियों को तैनात नहीं किए जाने के कारण केंद्रों में ताले लटके हुए हैं।
जिला पंचायत सदस्य प्रीती पाठक, बिलदे के ग्राम प्रधान संजय, डनगांव के सामाजिक कार्यकर्ता मोहन चंद्र के अलावा बद्री सिंह, तेज सिंह, बहादुर सिंह आदि का कहना है कि लोगों की अर्थव्यवस्था का मुख्य साधन पशुपालन है। लेकिन पशुपालन विभाग की ओर से पशुओं के प्राथमिक उपचार तक की सुविधा भी मुहैया नहीं कराई जा रही है। इस संबंध में जल्द ही ग्रामीणों का शिष्टमंडल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलेगा। संवाद