चंपावत। उत्तराखंड के सबसे प्रमुख लोकप्रिय त्योहारों में शामिल फूलदेई का पर्व वसंत ऋतु के आगमन में मनाया जाता है। चैत्र माह की प्रथम तिथि से हिंदू नववर्ष का शुभारंभ भी होता है। फूलदेई का त्योहार ऋतु परिवर्तन में प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का पर्व है। इस दिन कई बच्चे फूलदेई छम्मादेई देली द्वार भर भकार, यो देली सौ बारंबार...(यह देहरी फूलों से भरपूर हो और सबकी रक्षा करे और घरों में अन्न के भंडार कभी खाली न होने दे)) आदि गीत गाते तमाम इलाकों में फूलदेई का पर्व उल्लास से मनाते है। बच्चे फूल और चावल से घरों की देहरी का पूजन करते हैं।
फूलदेई वाले दिन देहरी पूजन पर लोग बच्चों को गुड़, चावल, मिठाई, पैसे इत्यादि देते हैं। संस्कृति के जानकार और कर्मकांडी पंडित बसंत बल्लभ पांडेय के अनुसार पहाड़ की संस्कृति के मुताबिक इस दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है। इस समय पहाड़ों में अनेक प्रकार के सुंदर और रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं। फूलदेई पर्व को लेकर पौराणिक मान्यता है कि भगवान शिव शीतकाल में तपस्या में लीन थे। ऋतु परिवर्तन के कई वर्ष बीत गए लेकिन भगवान शिव की तपस्या नहीं टूटी।
ऐसे में मां पार्वती ने शिव की तंद्रा तोड़ने के लिए शिवगणों को पीले वस्त्र पहनाकर उन्हें अबोध बच्चों का स्वरूप दे दिया। फिर सभी देवता ऐसे फूल चुनकर लाए जिनकी खुशबू से कैलाश पर्वत महक उठा। देवताओं ने महकते फूल सबसे पहले शिव के तंद्रालीन मुद्रा को अर्पित किए गए जिसे फूलदेई कहा गया। इसके बाद शिव की तंद्रा टूटी लेकिन सामने बच्चों के वेश में शिवगणों को देखकर उनका क्रोध शांत हो गया।
फूलदेई पर्व के साथ आज से शुरू होगा भिटौली का महीना
चंपावत। फूलदेई पर्व के साथ ही बुधवार से भिटौली का माह भी शुरू होगा। इसमें पूरे माह तक विवाहित महिला के परिजनों की ओर से उसके ससुराल में जाकर मुलाकात कर उसे उपहार दिए जाते हैं। परिजन बेटी के लिए घर में बने व्यंजन जैसे आटे, चावल, दूध, घी, चीनी, तेल, खीर, मिठाई, फल, वस्त्र आदि लेकर जाते हैं। शादी के बाद की पहली भिटौली लड़की को बैसाख में दी जाती है और उसके पश्चात हर वर्ष भिटौली चैत्र में दी जाती है। लड़की चाहे कितने ही संपन्न परिवार में ब्याही गई हो उसे अपने मायके से आने वाली भिटौली का हर वर्ष बेसब्री से इंतजार रहता है। इस वार्षिक सौगात में उपहार स्वरूप दी जाने वाली वस्तुओं के साथ ही उसके साथ जुड़ी कई अदृश्य शुभकामनाएं, आशीर्वाद और ढेर सारा प्यार-दुलार विवाहिता तक पहुंच जाता है।