चंपावत/लोहाघाट/टनकपुर/बनबसा। जिले में मंगलवार की अर्धरात्रि भूकंप के तेज झटके से लोग सहम गए। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय ने बताया कि रात 1:57 बजे पांच सेकेंड तक भूकंप के झटके आए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्कैल में 5.7 मापी गई। वहीं दूसरा भूकंप का झटका सुबह करीब छह बजे आया लेकिन इसकी तीव्रता कम होने से इसका ज्यादातर लोगों को अहसास तक नहीं हुआ। रात में ही प्रशासन सक्रिय हो गया। राजस्व, पुलिस, आपदा विभाग को मुस्तैद किया गया है।
रात को आए भूकंप के झटकों से टनकपुर क्षेत्र में तीन मकानों में मामूली दरार के अलावा किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है। टनकपुर के खेतखेड़ा के गोपाल सिंह, छीनीगोठ की रूपा देवी और मुन्नी देवी के मकानों में दरार आ गई। नुकसान तो कम हुआ लेकिन भूकंप के झटके से रात में लोगों में दहशत मच गई। पूर्णागिरि क्षेत्र में जगदीश चंद्र ने बताया कि भूकंप के झटके से मेज में रखा बर्तन गिर गया। लोहाघाट में फार्मासिस्ट मुकुल कुमार राय तिमंजिले से नीचे उतर आए और फिर पूरी रात जागते रहे। इसके अलावा कई अन्य स्थानों पर भी लोग अपने घरों से बाहर निकल इधर-उधर भागने लगे।
भूकंपरोधी तकनीक का निजी भवनों में कम हो रहा उपयोग
चंपावत। मंगलवार की अर्धरात्रि आए भूकंप से लोग सहमे हैं। हिमालय से लगे उत्तराखंड का अधिकांश भाग भूकंप के लिहाज से संवेदनशील जोन में है। इसके बावजूद भवनों के निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक का उपयोग नहीं हो रहा है। ज्यादातर निजी मकान भूकंप से बचाव में नाकाम है।
आंकड़ों के मुताबिक राज्य बनने केे बाद से जिले में करीब साढ़े छह हजार निजी इमारतों का निर्माण हुआ लेकिन इनमें से पांच प्रतिशत से भी कम भवनों में ही भूकंप से बचाव का इंतजाम है। भूकंपरोधी तकनीक की अनदेखी गांवों में तो है ही, शहर भी इससे दूर हैं। ज्यादातर भवन स्वामियों का कहना है कि निर्माण के जानकारी न देने के अलावा खर्चीला होने से चाह कर भी इस तकनीक को नहीं अपना पा रहे हैं। भूकंपरोधी तकनीक से लागत में करीब 15 फीसदी इजाफा होता है।
सरकारी इमारतों में अब हो रहा पालन
चंपावत। संवेदनशील होने के चलते प्रदेश में सरकारी इमारतों में भूकंपरोधी तकनीक का उपयोग अनिवार्य किया है और अब इसका पालन भी किया जा रहा है लेकिन पहले बन चुके कलक्ट्रेट, डिग्री कॉलेज, विकास भवन सहित बहुत से कार्यालयों केे भवन निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया गया है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय का कहना है कि सरकारी भवनों के निर्माण में अनिवार्य रूप से भूकंपरोधी तकनीक का पालन किया जा रहा है।
फ्रेमिंग स्ट्रक्चर पर आधारित है भूकंपरोधी तकनीक
चंपावत। भूकंपरोधी तकनीक के निर्माण का आधार फ्रेमिंग स्ट्रक्चर है। लोनिवि के ईई विभोर गुप्ता का कहना है कि इसमें मुख्य रूप से आरसीसी और स्टील फ्रेमिंग का उपयोग होता है। निर्माण से पूर्व मृदा परीक्षण होता है। लोनिवि के मुताबिक स्ट्रक्चर पर आधारित डिजाइन रिपोर्ट को विभाग में अनिवार्य किया गया है। भूकंप से भवनों को बचाव की बारीकियों की समय समय पर जानकारी दी जाती रही है।