लोहाघाट अस्पताल का मुआयना करते डीएम व अन्य अफसर।
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अमर उजाला ब्यूरो चंपावत। जिले के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य केंद्र चंपावत जिला अस्पताल की तमाम स्वास्थ्य सेवाओं को यहां से 13 किलोमीटर दूर लोहाघाट शिफ्ट किया जा सकता है। ये व्यवस्था अस्थाई रूप से होगी। इस संभावना को टटोलने के लिए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के अफसरों ने लोहाघाट उप जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं का मुआयना किया। फिलहाल इस पर अंतिम रूप से निर्णय नहीं लिया गया है। इस पर दोनों अस्पतालों के मुख्य चिकित्साधीक्षक मंत्रणा कर डीएम को सुझाव देंगे। जिला अस्पताल को कोविड-19 की महामारी के मद्देनजर डेडिकेटेड कोविड केयर सेंटर बनाया गया है। इसमें कुल 66 बैड हैं। इस वक्त 1 जून की रात से कोविड-19 के 21 संक्रमित मरीज यहां आइसोलेट किए गए हैं। इसके चलते 2 जून को जिला अस्पताल में इलाज नहीं हुआ, बल्कि यहां की ओपीडी एक निजी अस्पताल में चलाई गई। अलबत्ता 3 जून से डेडिकेटेड सेंटर के ब्लाक में बैरिकेड कर फिर से जिला अस्पताल में इलाज शुरू कर दिया गया।
इसके बावजूद हो रही दिक्कत को देखते हुए प्रशासन जिला अस्पताल के उपचार की समूची व्यवस्था को अस्थाई रूप से लोहाघाट कराने के विकल्प पर विचार कर रहा है। इसके चलते अब डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय, एसपी लोकेश्वर सिंह,सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी और सीएमएस डॉ. आरके जोशी सहित कई अधिकारियों ने लोहाघाट अस्पताल का मुआयना कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। तथा लोहाघाट से जिला अस्पताल की ओपीडी, आपात सेवा व गर्भवती महिलाओं से संबंधित उपचार करने की संभावनाओं पर विचार किया। अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। लोहाघाट व चंपावत के सीएमएस को अपनी राय देने को कहा गया है। ---- ::: चार हफ्ते तक पहले भी बंद रही थी जिला अस्पताल की ओपीडी : चंपावत। चंपावत जिला अस्पताल में ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) की सेवाएं कोरोना महामारी को लेकर शुरू हुए लॉकडाउन के कुछ दिनों बाद भी बंद रही थी। यहां 30 मार्च से 26 अप्रैल तक भी ओपीडी सेवा बंद रही थी। इस दौरान सिर्फ आपात सेवा ही संचालित थी।