टनकपुर (चंपावत)। कोरोना काल में उप जिला अस्पताल में खुला पांच बेड का आईसीयू निश्चेतक और फिजिशियन समेत स्टाफ की कमी से शोपीस बना है। अगस्त में दो मरीजों को भर्ती किया गया। इसके बाद से यूनिट बंद है। यूनिट के लिए स्वीकृत 29 पदों पर मात्र चार नर्सिंग स्टाफ तैनात हैं। अस्पताल प्रशासन के आईसीयू के लिए स्टाफ को लेकर भेजे जा रहे पत्रों का निदेशालय से कोई सकारात्मक जवाब अभी तक नहीं मिला है।
पहाड़ के प्रवेश द्वार के प्रमुख उप जिला अस्पताल में टनकपुर-बनबसा के साथ ही पहाड़ में हादसों और गंभीर मरीजों को समय से इलाज देने का जिम्मा रहता है। इसके लिए कोरोना काल में लाखों लागत से अस्पताल भवन में पांच बेड का आईसीयू बनाया गया। इसमें ऑक्सीजन, वेंटिलेटर समेत अन्य सभी उपकरण लगे हैं लेकिन स्टाफ की कमी से आईसीयू पूरी तरह क्रियाशील नहीं है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यूनिट के लिए सबसे आवश्यक फिजिशियन, निश्चेतक का भी पद रिक्त है। यूनिट में कुल 29 पदों में चार चिकित्साधिकारी, चार कक्ष सेवक, तीन लैब तकनीशियन, छह पर्यावरण मित्र, दो ऑक्सीजन प्लांट के लिए तकनीशियन, सहायक, चार लैब सहायक, दो निश्चेतक के पद रिक्त हैं। आईसीयू में मात्र चार स्वीकृत नर्सिंग अधिकारी तैनात हैं। रिक्त पदों के भरने के प्रति उदासीनता से आईसीयू अधिकांश समय शोपीस बना हुआ है।
उप जिला अस्पताल में पांच बेड के आईसीयू के संचालन के लिए स्वीकृत 29 पदों पर चार नर्सिंग अधिकारी ही तैनात हैं। नौ अगस्त को किरौड़ा नाले में बहे पूर्णागिरि के श्रद्धालु को आईसीयू में भर्ती किया गया था। इसके बाद से किसी को भी भर्ती नहीं किया गया है। निश्चेतक समेत अन्य स्टाफ की मांग निरंतर की जा रही है। - डाॅ. घनश्याम तिवारी, सीएमए, उप जिला अस्पताल, टनकपुर।