चंपावत। जिले के प्रशिक्षित बेरोजगार पिछले दो दशक से नौकरी को लेकर सरकार से आस लगाए हैं। वर्ष 2005 के बाद में जिले के व्यायाम प्रशिक्षित बेरोजगारों की संख्या सैकड़ों में है। कई प्रशिक्षित निर्धारित आयु सीमा पार कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि समाधान नहीं होगा तो वे आंदोलन करेंगे।
जिले के प्रशिक्षित बेरोजगारों का कहना है कि वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने प्रत्येक स्कूल में एक व्यायाम शिक्षक को नियुक्ति देने की बात कही थी। अनेक छात्र-छात्राओं ने राज्य के बाहर महाराष्ट्र, औरंगाबाद, नागपुर, ग्वालियर, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कॉलेजों में लाखों रुपये खर्च कर शारीरिक शिक्षा का प्रशिक्षण लिया था। तब से इन प्रशिक्षित बेरोजगारों की संख्या बढ़कर ढाई हजार से भी ज्यादा हो चुकी है। व्यायाम प्रशिक्षित बेरोजगारों का कहना है कि सरकारों को चुनाव के समय ही बेरोजगारों की याद आती है। सुरेंद्र सिंह माहरा, नरेश जोशी, रमेश सिंह, त्रिलोक सिंह, विपिन उप्रेती, पुष्पेद्र सिंह, कमला जोशी, सुमन जोशी आदि का कहना है कि उनके साथ अन्य राज्यों के प्रशिक्षण प्राप्त किए अनेक प्रशिक्षणार्थियों को नौकरी मिल चुकी है लेकिन जिले के हजारों प्रशिक्षित अभी बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। नौकरी की आस में अनेक बेरोजगार निर्धारित आयु सीमा पार कर गए हैं। इधर, बीपीएड संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश चंद्र पांडेय का कहना है कि बेरोजगार प्रशिक्षितों के हक के लिए लगातार संघर्ष जारी रहेगा।