रीठा साहिब (चंपावत)। लधिया घाटी क्षेत्र में पशुओं के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां के दोनों पशु सेवा केंद्रों में एक साल से अधिक समय से ताले लटके हुए हैं। पशु सेवा केंद्रों का संचालन न होने के कारण मवेशियों के इलाज के लिए पशुपालकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
लधिया घाटी में रीठा साहिब और भिंगराड़ा में दो पशु सेवा केंद्र हैंं। दोनों केंद्रों में एक कर्मचारी न होने से लधिया क्षेत्र के लोगों को मवेशियों के इलाज के लिए लंबी दौड़ लगानी पड़ रही है। रीठा साहिब के लोगों को मवेशियों के इलाज के लिए 51 किलोमीटर दूर खेतीखान पशु अस्पताल जाना पड़ता है। इसमें इलाज के लिए एक फेरे में ही 800 से डेढ़ हजार रुपये तक खर्च करना पड़ता है। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के इलाज, टीकाकरण पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। कृत्रिम गर्भाधान के अलावा विभागीय योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने में कठिनाई आ रही है।
रघुवर बोरा, प्रमोद सिंह, उमेश भट्ट सहित कई ग्रामीणों ने पशुपालन विभाग को पत्र भेजकर जल्द पशु सेवा केंद्र के संचालन के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पीएस भंडारी का कहना है कि पशुधन प्रसार अधिकारी की कमी की वजह से ये केंद्र संचालित नहीं हो पा रहे हैं। बंद केंद्रों का अतिरिक्त जिम्मा पास के पशुधन प्रसार अधिकारियों को दिया गया है।