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पशुपालकों के मित्र बनेंगे पशुमित्र

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चंद्रशेखर जोशी
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चंपावत। किसानों की आमदनी भले ही दोगुनी न हो लेकिन हालत को सुधारने में खेती के साथ पशुपालन महत्वपूर्ण जरिया है। कृषि के बाद सबसे ज्यादा लोग पशुपालन पर निर्भर हैं। पशु अस्पताल और पशु प्रसार केंद्रों की खस्ताहाल स्थिति पशुपालकों के आड़े आ रही है। उम्दा पशुधन होने के बावजूद पशुपालकों की हालत में खास सुधार नहीं हो पा रहा है लेकिन अब पशुमित्र पशुपालकों के मित्र बन सकेंगे।
जिले के 32 पशुमित्रों को इन दिनों ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (एसबीआई आरसेटी) में 60 दिन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये पशुमित्र जानवरों का प्राथमिक इलाज कर सकेंगे। कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण, पशुओं में होने वाले अन्य सामान्य रोगों का उपचार भी हो सकेगा। संस्थान के निदेशक आरपी टम्टा बताते हैं कि इन पशुमित्रों को पशुपालन विभाग के तालमेल से काम दिलाने में मदद की जाएगी।
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चंपावत के 20 प्रतिशत पशु अस्पतालों में डॉक्टर नहीं
चंपावत। तीन लाख की आबादी वाले चंपावत जिले में 1.34 लाख पशुपालक हैं। 1.07 लाख गायों सहित 2.43 लाख से ज्यादा पशु हैं। दुधारू जानवर भैंस, बकरी, सुअर, खरगोश, मुर्गी, घोड़े, खच्चरों को भी यहां बहुतायत संख्या में पाला जाता है। मौजूदा वित्त वर्ष में पशुपालन संवर्द्धन के लिए 95.25 लाख रुपये का जिला योजना में प्रावधान किया गया है।
इन सबके बावजूद पशुपालकों की हालत में खास सुधार नहीं हो पा रहा है। 15 पशु अस्पतालों में से तीन में डॉक्टर और 22 पशु प्रसार केंद्रों में से 11 में पशुधन प्रसार अधिकारी नहीं हैं। इससे ग्रामीणों को मवेशियों के इलाज के लिए 15 से 45 किमी दूर तक जाना पड़ता है। अब पशुमित्र योजना से हालात में सुधार होने की उम्मीद है।
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इन तीन पशु अस्पतालों में नहीं हैं चिकित्साधिकारी
चल्थी, बर्दाखान पशु अस्पताल, अंगोरा शशक प्रजनन प्रक्षेत्र चंपावत।
इन 11 केंद्रों में नहीं हैं पशुधन प्रसार अधिकारी
तामली, मंच, खतेड़ा, रौसाल, बसेड़ी, रैघांव, देवीधुरा, जोश्यूड़ा, भिंगराड़ा, सूखीढांग, ऊचौलीगोठ।
जिले में तीन पशु चिकित्सकों और 11 पशुधन प्रसार अधिकारियों के पद खाली हैं। इस वजह से कई ग्रामीण इलाकों में परेशानी है। विभाग से सीधा संबंध न होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में पशुमित्रों के होने से दूरदराज के गांवों में जानवरों के प्राथमिक स्तर के इलाज में राहत मिल सकेगी। - डॉ. पीएस भंडारी, सीवीओ, चंपावत।
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