चंद्रशेखर जोशी, चंपावत। इसे धन की बर्बादी कहे, नियोजन की कमी, विभागीय समन्वय का अभाव या प्राथमिकताओं का फेर। चंपावत जिले में सरकारी अमला एक कोल्ड स्टोर तो चला नहीं सका और अब दूसरे को बनाने में लग गया है। टनकपुर में 15 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित किए गए कोल्ड स्टोर के लिए जमीन की तेजी से तलाश चल रही है। यहां से सात किमी दूर मुडिय़ानी में 1995 में बने कोल्ड स्टोर भवन का मकसद पिथौरागढ़ और चंपावत जिले के आलू, सेव और सिटरस उत्पादकों के कृषि उत्पादों को संग्रहित करना था। 19 नाली सात मुट्ठी जमीन पर 77.77 लाख रुपये लागत से यह छह मंजिला कोल्ड स्टोर भवन बनकर तैयार हुआ, लेकिन भवन निर्माण के अलावा दूसरा कोई काम नहीं हुआ। न तापमान को ठंडा करने के लिए रेफरिजरेशन लगा और न ही वुडन वर्क हो सका। इस वजह से मोटी रकम खर्च होने के बाद भी दो हजार मीट्रिक टन क्षमता वाला भवन कोल्ड स्टोर के रूप में कभी शुरू नहीं हो सका। नतीजा यह हुआ कि किसानों को कोल्ड स्टोर के होने से मिलने वाले फायदे नहीं मिल सके। आलू, सेब और सिटरस फलों को न स्टोर कर पाते हैं और नहीं इसकी अच्छी कीमत उन्हें मिल पाती है
जिला उद्यान अधिकारी एनके आर्या ने बताया कि कोल्ड स्टोर भवन में रेफरिजेशन और वुडन वर्क नहीं हो सका था। इस कारण इसका कृषि उत्पादों के संग्रहण के लिए उपयोग नहीं हो सका।
-::: " जिले के मैदानी क्षेत्र में कोल्ड स्टोर सहित कृषि उत्पादों के लिए जैविक मंडी स्थापित करने का प्रस्ताव है। इसके लिए भूमि की तलाश के साथ अन्य कार्य किए जा रहे हैं।" -सुरेंद्र पाल, जिला सहायक निबंधक।
-::: कोल्ड स्टोर को छोड़ कई तरीकों से हुआ भवन का उपयोग :: कोल्ड स्टोर का उपयोग सब्जी, फल आदि को स्टोर करने के लिए नहीं हो सका है। अलबत्ता इस भवन का अन्य तमाम तरीकों से उपयोग किया गया। शुरू में पुलिस विभाग और उसके बाद पूर्ति विभाग ने गोदाम के रूप में उपयोग किया। 2009 से 2015 तक अल्मोड़ा की विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने इस इमारत का इस्तेमाल बीज और खाद्य प्रसंस्करण के लिए किया। 2017 में इसे कुछ लोगों ने लीज पर लिया।
चंपावत जिले में उत्पादित फल: फल एरिया (हेक्टेयर में) उत्पादन (एमटी में) सिटरस फल 2226 4459 आलू 2616 4275 सेब 619 639