क्वैराला पंपिंग योजना के ओवरफ्लो टैंक से चंपावत के किस्कोट गांव में खेत को हुआ नुकसान। संवाद न्य?
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चंपावत। क्वैराला लिफ्ट पेयजल योजना से चंपावत क्षेत्र के लोगों को अभी पानी मिलना तो शुरू नहीं हुआ है लेकिन इस योजना के ओवरफ्लो टैंक से किस्कोट गांव में मकान और खेत को नुकसान हुआ है। पानी के तेज बहाव के कारण 30 नाली खेत में बागवानी और फसल बर्बाद हो गई है। इससे पेयजल लाइन भी क्षतिग्रस्त हुई है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद निगम के अधिकारियों ने टैंक में पेयजल आपूर्ति बंद करवा दी।
क्वैराला पंपिंग योजना का काम पूरा होने और टेस्टिंग होने के बाद भी पेयजल वितरण नहीं हो पा रहा है। पानी पीने लायक नहीं होने से ये नौबत आई है। वहीं पेयजल निगम के 150 किलोलीटर (डेढ़ लाख लीटर) पेयजल टैंक के ओवरफ्लो होने से बुधवार को खेत खलिहान से लेकर गांव की पेयजल लाइन को नुकसान हुआ है। इससे बचीराम जोशी, गिरीश जोशी, परमानंद जोशी, धर्मानंद जोशी, रेवती देवी के खेत में सब्जी और अन्य खड़ी फसल बर्बाद हो गई है। ग्रामीण शेखर जोशी के मकान और गांव के ही मंदिर के पीछे की दीवार को भी आंशिक नुकसान पहुंचा है।
क्वैराला पंपिंग योजना के किस्कोट स्थित टैंक को ठीक से संचालन करने के लिए दो कर्मचारियों की व्यवस्था की गई थी। पानी भरने के बाद भी टैंक की आपूर्ति बंद क्यों नहीं हुई, इसका पता लगाया जाएगा। साथ ही आगे न हो कर्मियों को इसकी हिदायत दी गई है।
वीके पाल, ईई, पेयजल निगम, चंपावत खंड।
छह साल बाद भी नहीं मिल रहा पानी
चंपावत। चंपावत पुनर्गठन पेयजल योजना (क्वैराला पंपिंग योजना) का काम अगस्त 2016 में शुरू होने के बाद भी अब तक पानी नहीं मिल पाया है। 30.88 करोड़ रुपये की इस योजना से 30 वर्ष तक यहां की 29 हजार लोगों की जरूरत पूरी होनी है। 17 किलोमीटर लंबी पेयजल लाइन वाली इस योजना का ट्रायल पूरा करने के बाद 20 जून से पेयजल आपूर्ति करनी थी मगर पानी की टेस्टिंग रिपोर्ट अनुकूल नहीं आने से योजना को झटका लगा। वहीं 13 जुलाई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने योजना में देरी और अन्य खामियों की जांच के भी आदेश दिए हैं।