मां पूर्णागिरि धाम में ककरालीगेट की इस जगह से मुख्य मंदिर तक होगी पथ प्रकाश की व्यवस्था। संवाद
चंपावत। मां पूर्णागिरि धाम की बिजली व्यवस्था अब सिर्फ तीन माह की मेला अवधि के लिए नहीं होगी बल्कि यहां पथ प्रकाश सालभर रहेगा। ऊर्जा निगम ने इसके लिए कवायद शुरू कर दी है। 3.72 करोड़ रुपये से यह काम कराया जाएगा। इससे श्रद्धालुओं को सुविधा के साथ ही टनकपुर से पूर्णागिरि धाम क्षेत्र की चार ग्राम पंचायतों को भी फायदा होगा। मेले के दौरान की जानी वाली अस्थायी व्यवस्था पर 40 लाख रुपये से अधिक का खर्च भी बच जाएगा।
पूर्णागिरि मंदिर समिति अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी के आग्रह पर टनकपुर के ककरालीगेट से पूर्णागिरि धाम तक यात्रा मार्ग पर स्थायी पथ प्रकाश की मार्च में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की थी। इस एलान के बाद ऊर्जा निगम ने शुरुआती सर्वे करने के साथ ककरालीगेट से भैरव मंदिर तक करीब 18 किलोमीटर क्षेत्र का आगणन तैयार किया है। भैरव मंदिर से मुख्य मंदिर के चार किलोमीटर पैदल हिस्से का सर्वे अभी नहीं हो सका है। इस काम के मूर्त रूप लेने के बाद धाम का 22 किलोमीटर क्षेत्र मेले के तीन माह नहीं बल्कि सालभर रात के वक्त जगमगाएगा। इस पथ प्रकाश का लाभ गैडाख्याली, थ्वालखेड़ा, ऊचौलीगोठ और कालीगूंठ ग्राम पंचायतों के सड़क से लगे इलाकों को मिलेगा। मंदिर समिति के अध्यक्ष का कहना है कि मेला संचालन समिति पथ प्रकाश की व्यवस्था देखेगी। बाक्स
बिजली व्यवस्था पर दस साल में खर्च हुए चार करोड़
चंपावत। आस्था के केंद्र मां पूर्णागिरि धाम में मोटी रकम खर्च होती है। दस साल (2013 से 2022 तक) में हुए सरकारी मेले में करीब 865 दिन में 4.05 करोड़ रुपये पथ प्रकाश और मेला क्षेत्र की बिजली पर खर्च हुए हैं। इस लिहाज से औसतन रोजाना 46 हजार रुपये से अधिक बिजली की व्यवस्था पर खर्च हो रहे हैं।
कोट
ककरालीगेट से पूर्णागिरि धाम तक पथ प्रकाश की स्थायी व्यवस्था के लिए सर्वे किया जा रहा है। पथ प्रकाश की व्यवस्थागत जिम्मेदारी लेने वाली एजेंसी के निर्धारण के बाद फिर से उस एजेंसी के साथ संयुक्त सर्वे कर अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रवि कुमार, ईई, ऊर्जा निगम, चंपावत।