चंपावत। जिले में जमीन की कमी हिलांस आउटलेट पर भारी पड़ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 13 जुलाई 2022 को ऐसे सात आउटलेट की घोषणा की थी। लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूमि नहीं मिलने से पांच को विलोपित कर दिया गया है। अब सिर्फ दो ही आउटलेट बनेंगे।
एकीकृत आजीविका परियोजना ने स्थानीय उत्पादों का हिलांस ब्रांड बनाया है। स्वयं सहायता समूहों और किसानों की मजबूती के लिए फल, सब्जियां, दाल, मसाले, शहद सहित अन्य स्थानीय उत्पादों को बाजार देने के लिए जिले में हिलांस के सात आउटलेट बनाए जाने थे लेकिन 14 माह बाद भी कोई केंद्र नहीं बन सका है।
एनएच किनारे जमीन नहीं मिलने से पांच (बनबसा, टनकपुर, सिन्याड़ी, स्वांला और चंपावत स्टेशन) हिलांस आउटलेट विलोपित कर दिए गए हैं। चंपावत में स्थानीय फल, सब्जियां और मोटा अनाज मिलाकर 77 हजार मीट्रिक टन से अधिक पैदावार होती है। ऐसे में पांच आउटलेट नहीं बनने से काश्तकारों को झटका लगा है। संवाद
बापरू और मानेश्वर में बनेंगे आउटलेट
चंपावत। जिले में सिर्फ दो हिलांस आउटलेट बनाए जाएंगे। दोनों जगह राजस्व विभाग की जमीन उपलब्ध हो गई है। बापरू में 10.50 लाख और मानेश्वर में 8.66 लाख रुपये से इन आउटलेट का निर्माण होगा। आउटलेट में स्थानीय कृषि उत्पादों के अलावा कैफे की भी सुविधा होगी।
कोट
जिले के लिए स्वीकृत सात में से पांच हिलांस आउटलेट एनएच किनारे उपयुक्त स्थान पर भूमि नहीं मिलने से बनाया जाना संभव नहीं है। इन पांचों आउटलेट के विलोपन के लिए विभाग को पत्र भेजा जा रहा है। - विम्मी जोशी, परियोजना निदेशक, डीआरडीए, चंपावत।