चंपावत। चंपावत जिले में पिछले साल 30 नवंबर से लेकर अब तक मेघ नहीं बरसे हैं। इसका असर खेत-खलिहानों पर पड़ा है। बारिश न होने से पहाड़ में न फसलें ठीक से जम पाई हैं और न ही फसल ठीक से बढ़ पा रही हैं। पानी की कमी से खेतों में खुरदरापन होने के अलावा सब्जियां बर्बाद होने लगी हैं। एक सप्ताह में बारिश न हुई तो फसलें बर्बाद होेने का अंदेशा है।
चंपावत जिले में 15347 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है। सिंचाई की सुविधा बमुश्किल 2600 हेक्टेयर क्षेत्र (16.94 प्रतिशत) में है। अब बारिश नहीं होने से फसलों पर मार पड़ी है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक चंपावत में 30 नवंबर 2022 में आखिर बार बारिश हुई वह भी सिर्फ तीन दिन (11, 24 और 30 नवंबर को) एक-एक मिमी। सूखे जैसे इस हाल से खेतों में नमी कम हो गई है। रघुवर मुरारी, संजय सिंह, विक्रम, हीरा सिंह आदि का कहना है कि गेहूं, जौ, लहसुन, प्याज के पौध पीले पड़ गए हैं। पाले से पालक, राई को नुकसान हो रहा है। दलहनी फसलों की वृद्धि पर असर पड़ रहा है। 50 प्रतिशत नुकसान का अंदेशा जताया है।
बारिश नहीं होने से खेत सूखने के कगार पर हैं। इससे सब्जियों पर मार पड़ रही है। सूखे जैसी स्थिति में मेहनत पर पानी फिरने का अंदेशा हो रहा है।
- रघुवर दत्त मुरारी, लोहाघाट।
गेहूं से लेकर शाकभाजी की फसल बर्बाद होने के कगार पर है। क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा भी नहीं है। ऐसे में सरकारी मदद न मिली, तो कमर टूट जाएगी।
- नारायण दत्त जोशी, पल्सों।
अधिकारी भी मानते हैं हालात ठीक नहीं
खेतों में नमी कम हो रही है। ऐसे में अगर जल्द बारिश न हुई, तो 30 प्रतिशत से अधिक बागवानी और खेती प्रभावित होने का खतरा है।
- टीएन पांडेय, जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत।
बारिश नहीं होने से उपजे हालात का अभी विभाग ने जायजा नहीं लिया है। अगर 15 जनवरी तक बारिश न हुई, तो खेती पर असर पड़ेगा।
- गोपाल सिंह भंडारी, मुख्य कृषि अधिकारी, चंपावत।