चंपावत। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय की डिजिटल ग्राम योजना के तहत 45 किमी दूर बगौटी चंपावत जिले का पहला डिजिटल गांव है। नेपाल सीमा से लगे 400 की आबादी वाले इस गांव में ऑनलाइन आवेदन आदि कार्य शुरू होना था। लेकिन ऑनलाइन काम तो दूर, सामान्य नेटवर्क भी यहां ठीक से नहीं आता। अप्रैल 2019 में डिजिटल घोषित इस पहले गांव में न ऑनलाइन आवेदन हो पाते हैं, न टेलीपैथी न टेलीमेडिसन की सुविधा मिल पा रही है।
चंपावत ही नहीं पिथौरागढ़, बागेश्वर और अल्मोड़ा के भी 70 से अधिक ऐसे ग्रामीण क्षेत्र हैं, जहां इंटरनेट तो दूर किसी तरह की मोबाइल सेवा तक नहीं है। चंपावत जिले के 105 कॉलेज में से एक-चौथाई में मोबाइल नेटवर्क ही नहीं है। इसका असर यहां विकास और सुविधाओं के विस्तार में रोड़ा बन रहा है। तल्लादेश के मंच में तो बैंकिंग सेवा भी इस कारण प्रभावित रहती है। नेपाल सीमा से लगे कई भारतीय क्षेत्रों में नेपाल के मोबाइल नेटवर्क की घंटी बजती है और लोग उन सिम कार्ड का उपयोग करने को मजबूर हैं। बुधवार को पेश केंद्रीय बजट में डिजिटल लाइब्रेरी के प्रस्ताव की कामयाबी के लिए नेटवर्क को सशक्त करने की कड़ी चुनौती से पार पाना होगा। ऐसा छात्रों के साथ इसे संचालन करने वाले वर्ग का भी मानना है।
यह होता फायदा
नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी को स्कूलों से जोड़ने से पुस्तकों की कमी दूर होगी। हिंदी और अंग्रेजी से लेकर क्षेत्रीय भाषाओं में भी ये पुस्तकें डिजिटल प्लेटफार्म पर मिलेंगी। एक क्लिक पर विभिन्न विषयों की पुस्तकें पढ़ सकेंगे और ध्वनि भी सुनाई देगी।
डिजिटल लाइब्रेरी की राह सुगम करने के लिए जैसी जरूरत होगी, उसे पूरा किया जाएगा।
- जितेंद्र सक्सेना, सीईओ, चंपावत।
डिजिटल लाइब्रेरी के लिए पहाड़ में काफी बड़े क्षेत्र में तकनीकी दिक्कतें हैं। इस नए सिस्टम को शुरू करने से पहले छात्र-छात्राओं की काउंसलिंग भी जरूरी होगी।
- डॉ. वीरेंद्र मेहता, प्रभारी, जिला पुस्तकालय, चंपावत।
ग्रामीण क्षेत्र में छात्र-छात्राओं को कम खर्च और समय की बर्बादी के बगैर पढ़ने की सुविधा मिल सकेगी।
- मनीष महर, अध्यक्ष, चंपावत डिग्री कॉलेज, छात्रसंघ।
डिजिटल लाइब्रेरी और डिजिटलाइजेशन अभी पूरी तरह शहरी क्षेत्रों में ही शुरू नहीं हो सका है। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में नेटवर्क की खामी सबसे बड़ी चुनौती है।
- राजेंद्र प्रसाद, प्रतियोगी छात्र, चंपावत।
छात्रसंघ अध्यक्ष मनीष मेहरा।- फोटो : CHAMPAWAT
जिला पुस्तकालय प्रभारी डॉ. वीरेंद्र मेहता।- फोटो : CHAMPAWAT
सीईओ जितेंद्र सक्सेना।- फोटो : CHAMPAWAT