पाटी (चंपावत)। मोहित घर का इकलौता चिराग था। घर से गायब होने के बाद परिजनों ने मामले को संजीदगी से नहीं लिया। वे सोच रहे थे कि शायद कहीं दोस्ती-रिश्तेदारी में चला गया होगा। परिजन इंतजार कर रहे थे मोहित के आने का लेकिन आठ दिन लंबा इंतजार खत्म हुआ युवक की मौत की मनहूस खबर के साथ। अब इकलौते बेटे के जाने से परिजनों में मातम है।
बिसारी गांव का मोहित 23 सितंबर को दोपहर बाद से घर से गया और फिर जिंदा लौटकर नहीं आया। परिजनों को इस बात का भान नहीं रहा होगा कि मोहित के साथ कोई अनहोनी होने जा रही है। परिजन मोहित को आसपास और नाते-रिश्तेदारों के घरों में खोज करते रहे। उम्मीद करते रहे कि वह जहां भी होगा सुरक्षित होगा। आखिर में कहीं से कोई सुराग नहीं मिला तो थाने में 29 सितंबर को गुमशुदगी दर्ज कराई गई। अगर गायब होने के फौरन बाद गुमशुदगी की पुलिस को जानकारी दे दी जाती तो मोहित की जान बच सकती थी। पुलिस वह कार को पकड़ सकती थी जिसमें उसके साथी बेहोश मोहित को ले जा रहे थे। अब मोहित की हत्या परिजन को गहरे जख्म दे गई। मोहित इकलौता बेटा था और उससे बड़ी दो बहनें हैं। मां और बहनें बेसुध हैं।