चंपावत। काश्तकार बंदरों और सूअरों से परेशान हैं। यहां दिन में बंदर तो रात में सुअर खेतों में लगाई नकदी फसल को उजाड़ खा जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके खेतों में लगाई हल्दी जंगली जानवरों के बर्बाद करने से उनको आर्थिक रूप से नुकसान हो रहा है। धौन बगेड़ी के काश्तकार राजेंद्र जोशी, प्रेम बल्लभ और राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि उन्होंने बाजार से दो वर्ष पूर्व 105 रुपये क्विंटल अदरक का बीज खरीदा और पैदावार हुई मात्र डेढ़ क्विंचल। छह क्विंटल से ज्यादा पैदावार होने के आसार लगाए जा रहे थे। क्षेत्र के काश्तकार नगदी फसल के रूप में अदरक, हल्दी आदि की खेती करते हैं लेकिन जंगली जानवर खेती को चौपट कर जाते हैं। संवाद