चंपावत विकासखंड में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने को लेकर मनरेगा के तहत बनाई गई गौशाला।
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चंपावत। जिले में दुग्ध उत्पादन के माध्यम से पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए चयनित सात ग्राम पंचायतों में सैंतालीस लाख रुपये की लागत से दुग्ध क्लस्टर का निर्माण किया गया है। मनरेगा योजना में जिले में आजीविका परक योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए विकासखंड चंपावत की सात ग्राम पंचायतों को दुग्ध उत्पादन के लिए चयनित कर 98 पक्की गोशालाओं का निर्माण कराया गया है।
डीडीओ एसके पंत ने बताया कि विकासखंड के नगरीय क्षेत्र से लगी ग्राम पंचायत डड़ाबिष्ट, खलकड़िया, चैकुनीबोरा, बाजरीकोट, कोयाटी, ढकनाबडोला, पुनेठी में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मनरेगा योजना में सैंतालीस लाख से दुग्ध क्लस्टर बनाया गया है। इसमें आजीविका पैकेज के तहत अनुसूचित जाति के 12 परिवारों के अलावा महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य और विधवा लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया है। क्लस्टर से जुड़े गोपालन में अधिकतर महिला गोपालक हैं जिनकी प्रत्यक्ष आय दुग्ध उत्पादन के कार्य से जुड़ी है।
गोशाला के आसपास किया जा रहा है सब्जी उत्पादन
चंपावत। मनरेगा के तहत गोशाला बनाने वाले लाभार्थियों की ओर से गोशाला के आसपास की भूमि में कृषि कार्य कर मौसमी फल, सब्जी आदि का उत्पादन भी किया जा रहा है। लाभार्थी निर्मला देवी, उर्मिला देवी, कमला देवी आदि का कहना है कि जैविक खाद (गोबर) उचित मात्रा में उपलब्ध होने से फल, सब्जी आदि का अधिक मात्रा में पैदावार हो रही है।
पहले जंगल से लकड़ी आदि बीनकर या शहरी क्षेत्र में जाकर दैनिक मजदूरी आदि का कार्य करने वालीं महिलाएं अब दुग्ध उत्पादन कर आर्थिक निर्भरता की ओर बढ़ रहीं हैं। - संतोष कुमार पंत, डीडीओ, चंपावत।