चंपावत। मां पूर्णागिरि धाम मेले के आयोजक का जिम्मा मेला संचालन समिति से जिला पंचायत को स्थानांतरित हो गया है। इससे पूर्व भी जिला पंचायत 2010 तक मेले की आयोजक संस्था थी। आयोजक संस्था बदलने के बावजूद मां पूर्णागिरि मंदिर समिति की भूमिका किसी तरह कम नहीं होगी। समिति ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे मेले में श्रद्धालुओं को अधिक सुविधा मिलने में मदद मिलेगी।
मंदिर समिति भैरव मंदिर से मुख्य मंदिर तक के चार किलोमीटर तक के दायरे में मेले की व्यवस्थाओं से लेकर तीर्थ यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाएं मुहैया कराती रही है। अब तक सरकारी मेलावधि के तीन माह को छोड़ वैसे भी शेष समय मेले की व्यवस्था समिति ही करती रही है। समिति ने भैरव मंदिर क्षेत्र में आध्यात्मिक पुस्तकालय के जरिये लोगों के आध्यात्मिक ज्ञान को भी विस्तार दिया है।
मां पूर्णागिरि धाम मेले की आयोजक संस्था बदलने का शासन का निर्णय स्वागत योग्य है। मेले की व्यवस्था और संचालन में मंदिर समिति पहले की तरह सहयोग करती रहेगी। समिति धाम के आध्यात्मिक महत्व को बढ़ाने के साथ श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक सुविधा देने का प्रयास करेगी। - पंडित किशन तिवारी, अध्यक्ष मंदिर समिति।
बाटनागाड़ में मार्ग खुलने पर श्रद्धालुओं की आवाजाही भी शुरू
पूर्णागिरि धाम (चंपावत)। पूर्णागिरि धाम में फिर से श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई है। रविवार को करीब 200 श्रद्धालुओं ने देवी मां के दर्शन किए। इसी के साथ धाम में एक बार फिर से चहलपहल बढ़ गई है। मंदिर की दुकानें भी खुलने लगी हैं। पूर्णागिरि मार्ग पर बाटनागाड़ क्षेत्र में भारी मलबा आने से चार जुलाई से 21 जुलाई तक यह मार्ग बंद था। अब मार्ग खुलने के साथ ही तीर्थ यात्रियों की आवाजाही भी फिर से होने लगी है।