लोहाघाट (चंपावत)। राजकीय पीजी कॉलेज में भूमंडलीकरण, पर्यावरण, महिलाएं-आपसी संबंधों विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार का समापन हो गया है। समापन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. अजय रावत ने कहा कि उत्तराखंड के पास अनमोल संपदा यहां के जंगल हैं। यहां बुरांश की 80 प्रजातियां विद्यमान हैं। विश्व के 36 फीसदी जड़ी-बूटियां उत्तराखंड में ही पाई जाती हैं। उत्तराखंड एशिया का वाटर टावर है। उन्होंने स्लाइड शो के जरिए उत्तराखंड के वनों के इतिहास, पर्यावरण की जानकारियां दी। अद्वैत आश्रम मायावती के संत नरसिम्हानंद ने कहा कि लोहाघाट में पानी केवल वनों से बचा है।
यदि पेड़ों का दोहन होता रहा तो भविष्य में यहां गंभीर पेयजल संकट पैदा हो जाएगा। लोहाघाट नदी गंदगी और पॉलिथीन से प्रदूषित हो रही है। नवीन मुरारी का कहना था कि भूमंडलीकरण, पर्यावरण के इस दौर में उत्तराखंड के तीन हजार गांवों का पलायन हो गया है। युवा पीढ़ी पुस्तकों से दूर भाग रही है जो एक गंभीर समस्या है। प्रभात उप्रेती का कहना था कि लोहाघाट में उजड़ते जा रहे देवदार वृक्षों से भूस्खलन की संभावना बढ़ गई है। डॉ. बीएम पांडेय का कहना था कि केवल चार फीसदी महिलाएं सरकारी क्षेत्र में सेवारत है जबकि 96 फीसदी घरेलू कामों में ही लगी हुई हैं।
सेमिनार के आयोजक डॉ. धर्मेंद्र तिवारी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। प्राचार्य प्रो. केकेएस नेगी की अध्यक्षता में डॉ. कमलेश सक्टा, डॉ. रुचिर जोशी ने संचालन किया। डॉ. पल्लवी मिश्रा, डॉ. कल्पना लखेड़ा, डॉ. पीके रिछारिया, डॉ. प्रकाश लखेड़ा, डॉ. मनीषा, डॉ. दुर्गा तिवारी, स्वाति मेलकानी, शंकर दत्त पांडेय, गीता गैरोला ने विचार रखे। आयोजन में डॉ. ऊषा जोशी, डॉ. एके द्विवेदी, डॉ. धर्मेंद्र राठौर, डॉ. तौफीक अहमद, डॉ. रवि सनवाल, डॉ. जेसी जोशी, डॉ. प्रीति वर्मा, डॉ. पुष्पा आदि ने सहयोग किया।