लोहाघाट (चंपावत)। लोहाघाट डिपो बस की कमी से जूझ रहा है। 32 बेड़े वाले रोडवेज डिपो में मात्र 10 बस दुरुस्त हैं लेकिन उनकी स्थिति भी ठीक नहीं है। 22 बस पहाड़ पर चलने के सात लाख किमी के मानक पूरे कर चुकी हैं। इसके बाद भी खटारा हो चुकीं बसों का संचालन कर यात्रियों की जान से खिलवाड़ किया जा रह है।
रोडवेज बस में सफर करने वाले यात्रियों में हमेशा डर बना रहता है कि आगे मोड़ पर क्या हो जाए। कुछ दूरी पर पहुंचकर वह अपने परिवार वालों को फोन कर अपना हाल चाल बताते रहते हैं। बस कब, कहां किस समय खराब हो जाए किसी को नहीं पता। पिछले साल अक्तूबर में लोहाघाट डिपो की 22 बस मानक के आधार पर रिटायर हो गई थीं। इसके बावजूद यात्रियों की जान जोखिम में डालकर इन बस को दौड़ाया जा रहा है। इस वजह से यात्री टैक्सी वाहनों से लंबी दूरी की यात्रा करने के लिए मजबूर हैं।
कोट
पुरानी रोडवेज बस में सफर करने में हमेशा डर लगा रहता है। पुरानी बस बीच रास्ते में खराब हो रही हैं, जिस कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। सरकार को नई बस का संचालन कर यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देनी चाहिए।
- हरितिमा मुरारी, लोहाघाट।
एक समय था जब रोडवेज बस का सफर सबसे आराम और सुरक्षित होता था लेकिन पिछले कुछ समय से रोडवेज की सेवाएं काफी लचर हो गई हैं। लोग रोडवेज का सफर छोड़ कर दिल्ली, देहरादून, बरेली, हरिद्वार आदि लंबे रूट पर टैक्सियों से जाना पसंद कर रहे हैं।
- सुशीला पंत, लोहाघाट।