टनकपुर (चंपावत)। मौसम में तपिश बढ़ने के साथ ही जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर और बनबसा में बिजली-पानी की खपत बढ़ने लगी है। मार्च में जिस तेजी से तापमान बढ रहा है उसी तेजी से बिजली, पानी की खपत भी बढ़ रही है। पेयजल आपूर्ति सुचारु रखने में भी बिजली ज्यादा खर्च करनी पड़ रही है। हालांकि अभी शटडाउन को छोड़ बिजली की कटौती नहीं हो रही है लेकिन खपत ज्यादा बढ़ी तो कटौती की भी नौबत आ सकती है जिसे लेकर विभाग ने तैयारी तेज कर दी है।
गर्मियों में पहाड़ पर जहां बिजली की खपत कम होती है। वहीं मैदानी क्षेत्रों में बढ़ जाती है। मार्च से लगातार बढ़ रहा तापमान अप्रैल में 37 डिग्री पहुंच चुका है। घरों में पंखे, कूलर, एसी चलने शुरू हो गए हैं। जलापूर्ति के लिए नलकूपों की मोटर भी ज्यादा देर तक चलानी पड़ रही है जिससे बिजली की खपत बढ़ रही है। इस बार फरवरी तक मौसम में ठंडक से बिजली की खपत नहीं बढ़ी लेकिन मार्च में तापमान के साथ ही खपत भी बढ़नी शुरू हो गई है।
विभाग के मुताबिक फरवरी में टनकपुर और बनबसा में बिजली की खपत 3.05 एमयू (मिलियन यूनिट) थी जो मार्च और अप्रैल में बढ़कर 3.5 एमयू पहुंच गई है। यानि इन दो माह में बिजली की खपत 0.95 यूनिट बढ़ गई है।
मार्च क्लोजिंग के बाद अब पूरा ध्यान गर्मी में बिजली की खपत को नियंत्रित करने में है। इसके लिए विशेषकर बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए टीमें गठित कर छापे मारे जाएंगे। -विकास भारती, उप खंड अधिकारी टनकपुर।
ओवरहैड टैंकों को भरने के लिए फरवरी तक नलकूप को 12 से 14 घंटे चलाना पड़ रहा था जो अब बढ़कर 16 से 18 घंटे हो गया है। बीएस कुवार्बी, जेई, जल संस्थान।