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Champawat News: आयुर्वेद के प्रति रुझान बढ़ने पर भी नहीं सुधरे अस्पतालों के हालात

Sat, 14 Oct 2023 12:38 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
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चंपावत। पुरातन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। अस्पताल आने वालों की संख्या भी खूब बढ़ रही है लेकिन अस्पतालों में न आधारभूत ढांचा ठीक है और न ही अस्पतालों में चिकित्सक हैं।
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स्वस्थ जीवन के लिए आयुर्वेद रामबाण है। आयुर्वेदिक दवाओं का फायदा भले ही देर से मिलता है मगर इससे इलाज स्थायी होता है। इन सब खूबियों के बावजूद सरकारी आयुर्वेदिक अस्पतालों में इलाज की स्थिति ठीक नहीं है।
जिले में आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज कराने वालों की संख्या में दो साल में सात प्रतिशत इजाफा हुआ है। जिले के 21 सरकारी अस्पतालों के अलावा चार आयुष शाखाओं में 41,000 से अधिक मरीज होने के बावजूद ज्यादातर अस्पतालों का आधारभूत ढांचा ठीक नहीं है। दस अस्पताल किराये में हैं। कई में पानी और बिजली की भी कमी हैं तो चार में एक भी डॉक्टर नहीं है।
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चंपावत के अस्पताल के पास न भवन और न डॉक्टर
चंपावत। जिले के आयुर्वेदिक अस्पतालों की तस्वीर तो धुंधली है ही चंपावत शहर के अस्पताल के हाल भी अच्छे नहीं है। इस अस्पताल में न डॉक्टर है और न अपना भवन। अस्पताल की समूची व्यवस्था फार्मासिस्ट के हवाले है। क्वारसिंह के अस्पताल में पेयजल सुविधा भी नहीं है।
इन चार अस्पतालों में नहीं हैं डॉक्टर- रैघांव, चौड़ाकोट, मडलक और चंपावत शहर।
किराये में हैं ये दस अस्पताल- टनकपुर, बनबसा, बनलेख, क्वारसिंह, मूलाकोट, बर्दाखान, रैघांव, रौसाल, तामली और चंपावत शहर।

जिले के आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों के खाली पद भरने के लिए निदेशालय पत्र भेजा गया है। अस्पतालों के भवनों के लिए कई जगह भूमि की तलाश की जा रही है। टनकपुर में 50 शैया के अस्पताल की भी कवायद चल रही है। - डॉ. एएस गुसाई, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, चंपावत।
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