चंपावत। एक ही दिन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 103.70 करोड़ रुपये के शिलान्यास और लोकार्पण कर विकास की सोच को आगे बढ़ाया है। विकास के इन दावों और घोषणाओं का एक दूसरा सच भी है। इसे खुद कार्यक्रम के आयोजन स्थल जीजीआईसी ने ही उजागर किया है।
मुख्यालय के इस जीजीआईसी में पढ़ाने वालों की जबर्दस्त कमी है। छह प्रवक्ताओं और तीन एलटी शिक्षकों के अलावा बाबुओं की भी कमी है। कायदे की प्रयोगशाला और पुस्तकालय भी नहीं है। जीजीआईसी के प्रेक्षागृह (ऑडिटोरियम) में आयोजन कराने की वजह गोरलचौड़ मैदान के पास दस साल से बन रहे ऑडिटोरियम का पूर्ण नहीं होना है। कई कार्य न केवल लंबे समय से लटके हैं बल्कि ऐसे कार्यों की फेहरिस्त भी काफी लंबी है।
लंबे समय से अटके ये काम
1-सर्किट हाउस में सीएम सहित तमाम अति महत्वपूर्ण अतिथि विश्राम करते हैं, वहां एक भी कार्मिक की तैनाती नहीं है। राज्य संपत्ति विभाग के इस भवन की लोनिवि अस्थायी रूप से अपने तीन बेलदारों के जरिये देखरेख कर रहा है।
2-चंपावत में सर्किट हाउस के पास ही 99 लाख से बने हेलीपैड का काम पूरा बजट मिलने के बाद अधूरा तो है ही साथ ही आगे का काम भी चार साल से बंद है।
3-चंपावत में शूटिंग रेंज का बुधवार को भी एलान हुआ है लेकिन यहां पूल्ड हाउस के पास पहले से बनी शूटिंग रेंज का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
4-2015 में खुले चंपावत जिला पुस्तकालय की स्थापना के बाद से पुस्तकों के लिए न एक रुपये का बजट मिला और न ही स्टाफ की तैनाती हुई है।
5-चंपावत के राजबुंगा (किले) को हेरिटेज में तब्दील करने की 2015 की योजना एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी है।
6-बीसी खंडूड़ी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अप्रैल 2008 में चंपावत जिला जेल भवन का शिलान्यास किया था लेकिन 14 साल बाद भी जेल भवन लटका हुआ है।
7-टनकपुर-जौलजीबी सड़क पर चूका से रूपालीगाड़ को जोड़ने वाला 690 मीटर लंबा पुल 2015 से रुका है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा तेजी के साथ ही समयबद्ध तरीके से काम करा रही है। लटके और रुके काम जल्द पूरे कराए जाएंगे।
-मोहन सिंह अधिकारी, जिला मीडिया प्रभारी, भाजपा