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चम्पावत: किरोड़ा में एक साल में बनेगा पुल

Sat, 18 Feb 2023 05:57 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
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नायकगोठ-थ्वालखेड़ा के बीच किरोड़ा में पुल के लिए सर्वे करते कार्यदायी विभाग और ठेकेदार कंपनी की ट
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टनकपुर (चंपावत)। मुख्यमंत्री की घोषणा पर नायकगोठ-थ्वालखेड़ा के बीच किरोड़ा नाले पर स्टील गेडर ब्रिज (पुल) के निर्माण की कवायद फिर तेज हो गई है। 125 मीटर लंबे और 7.1 मीटर चौड़े इस पुल का निर्माण 13.77 करोड़ की लागत से होगा जो एक साल के अंदर बनकर तैयार हो जाएगा। ठेका आवंटित होने के बाद कार्यदायी लोनिवि और निर्माण एजेंसी की संयुक्त टीम ने शुक्रवार से सर्वे शुरू कर दिया है।
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इस स्थान पर पुल निर्माण की मांग लंबे समय से उठ रही थी। वर्ष 2021 में तत्कालीन विधायक कैलाश गहतोड़ी की पहल पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ईपीसी मोड के तहत पुल निर्माण की घोषणा की थी। वित्तीय मंजूरी के बाद मुख्यमंत्री ने 15 अक्तूबर 2022 को पुल की आधारशिला रखकर जल्द निर्माण शुरू करने के निर्देश दिए थे। कार्यदायी विभाग लोनिवि के एई लक्ष्मण सिंह सामंत ने बताया कि निर्माण कार्य देहरादून की केजीएल इन्फ्राट्रक्चर कंपनी को सौंपा गया है।

ठेकेदार कंपनी ने शुक्रवार से पुल निर्माण की कार्रवाई शुरू की। पहले चरण में सर्वे किया गया है जिसके बाद तेजी से निर्माण शुरू होगा। एई ने बताया कि ठेकेदार कंपनी को मार्च 2024 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। एक सप्ताह के अंदर कार्ययोजना तैयार कर निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
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पुल का काम शुरू होने से ग्रामीण में खुशी
टनकपुर (चंपावत)। पुल निर्माण का काम शुरू होने से नायकगोठ और थ्वालखेड़ा के ग्रामीणों में खुशी की लहर है। ग्राम प्रधान दीपा बोहरा, भवानी देवी, पूजा महर, निर्मला सामंत, पूर्व प्रधान सतीश पांडेय, गिरीश चंद्र जोशी, पूर्णागिरि मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष पं. भुवन चंद्र पांडेय, नरेश सकारी आदि ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताया है। संवाद


किरोड़ा नाले के उफनाने से बंद नहीं होगी आवाजाही
टनकपुर (चंपावत)। पुल के बनने से बरसात में किरोड़ा नाले के उफान की बाधा दूर होगी। थ्वालखेड़ा, गैंड़ाखाली, खेतखेड़ा, उचौलीगोठ के ग्रामीणों के साथ ही पूर्णागिरि दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी बरसात के दिनों में राहत मिलेगी। बता दें कि नाले के उफान पर आने से पूर्णागिरि मार्ग पर घंटों तक आवागमन बंद हो जाता है। ग्रामीण और स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर उफनाए नाले को आरपार करने का जोखिम उठाने के लिए मजबूर रहते हैं। संवाद
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