चंपावत। मौसम चक्र में आए बदलाव के कारण यहां सेब के पारंपरिक बागान पूरी तरह से खत्म होने के कगार पर हैं, तो किसान अब कीवी बागान विकसित कर रहे हैं। प्रदेश के मध्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की जगह कीवी रोजगार का शानदार जरिया बन रही है। शोध के बाद कीवी सेब की उन प्रजातियों का विकल्प बन चुका है जो मौसमी मार से अपना वजूद खो चुके हैं।
जिले में जैगांव-जैतोली, फुलारागांव, गोशनी, पोखरी, पम्तोला, मौनपोखरी, मुडियानी, गरसाड़ी, ढरौच, देवीधूरा आदि स्थानों पर किसान कीवी की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। नवीन वर्मा बताते हैं कि पहले खेतीखान क्षेत्र सेब पट्टी के रूप में जाना जाता था, लेकिन तापमान बढ़ने से धीरे-धीरे यहां पर सेब का उत्पादन कम होने लगा। इसके स्थान पर कीवी बेहतर विकल्प बन रहा है। आज उनके बगीचे में 50 से अधिक कीवी के पौधे हैं, जो अच्छा फल दे रहे हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र सुंई की प्रभारी अधिकारी डॉ. अमरीश सिरोही का कहना है कि मौसम चक्र में आए बदलाव के कारण अब जिले में सेब की डेलीसस प्रजातियों का उत्पादन लगभग समाप्ति की ओर है। इस बदलाव से खेती के तौर तरीके भी बदलते जा रहे हैं। कीवी पर शोध के बाद यह साफ है कि यह सेब का विकल्प बन चुका है।
कृषि विज्ञान केंद्र ने तैयार की हैं चार प्रजातियां
चंपावत। कृषि विज्ञान केंद्र सुंई में कीवी की चार प्रजातियां विकसित की गई हैं। केंद्र की उद्यान वैज्ञानिक डॉ. रजनी पंत ने बताया कि प्रारंभिक चरण में कीवी की एलीफैन, हैवलेड, मोंटी, तैमूरी प्रजातियों को विकसित कर इसके पौधे बांटे जा रहे हैं। यहां की जलवायु में एलीफैन प्रजाति काफी मुफीद मानी गई है। इसके लिए विशेष मिट्टी की जरूरत भी नहीं होती है। शुरुआती तीन वर्षों तक पौधों को पानी की जरूरत होती है।
कीवी फल के ये हैं लाभ
चंपावत। कीवी का पेड़ तीन वर्ष में फल देने लगता है जिसमें एक पेड़ से 60 से 70 किलो तक पैदावार ली जा सकती है। कीवी का बाजार भाव ढाई से तीन सौ रुपये प्रति किलो है। कीवी का फल विटामिन सी का अच्छा स्रोत है। यह कैंसर, खून की कमी दूर करने, पाचन शक्ति बढ़ाने, प्लेटलेट को नियंत्रित करने के अलावा रक्त संचार को सुचारु बनाए रखता है।
चंपावत में कीवी उत्पादन के लिए अनुकूल जलवायु है। किसान निजी स्रोत से सफलतापूर्वक कीवी की खेती कर आय बढ़ा रहे हैं। विभाग की ओर से इसे हॉर्टिकल्चर टेक्नोलॉजी मिशन में शामिल किया गया है। जल्द ही कीवी उत्पादकों को अनुदान योजना से जोड़ा जाएगा। - टीएन पांडेय, डीएचओ, चंपावत।