चंपावत। यहां कूर्मांचल एंग्लो संस्कृत विद्यालय में रविवार को काव्य गोष्ठी हुई। इसमें कई क्षेत्रों से आए कवियों ने सम सामयिक मुद्दों पर विविध कविताएं रचनाएं प्रस्तुत कीं। इसमें राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. बीसी जोशी ने कविता सुनाई। इसके बोल थे ‘कब से जलाते आ रहे, रावण कभी मरता नहीं, देह भस्मीभूत होता, रावण कभी जलता नहीं’।
युवा साहित्यकार हिमांशु जोशी ने ‘मन करता है जीवन में, अब फिर बच्चा बन जाऊं मैं’, कमलदीप जोशी ने ‘याद आते हैं वो दिन, वो साफ हवा, वो जगमगाते जुगनू’, जानकी जोशी ने ‘प्रकृति की सुंदरता, हरियाली का रंग’, अंकित भट्ट अंशु ने ‘कैसे भूमि से मिली नै, ये रहस्य मुझे बताओ’ कविता सुनाई।
अध्यक्षता करते हुए कविता शक्टा ने कहा ‘उम्र के एक दौर में आता है बुढ़ापा’। पुष्कर सिंह बोहरा ने ‘मैं हूं गांव का बंजर घराट’, नवीन चंद्र पंत ने ‘कहां गया वो उत्तराखंड महान जिसे मैं ढूंढ रहा हूं’ और बबीता जोशी ने ‘तुम तलाश करो ऐसे पुरुष की...’ शीर्षक की कविता सुनाई। नवीन चंद्र पंत ने संचालन किया।